जयपुर Abhayindia.com प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने शुक्रवार को बताया कि आरजीएचएस में 2 हजार रुपये से अधिक लागत वाली जांचों के लिए लागू प्री-ऑथराइजेशन व्यवस्था से बचने के लिए निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों को एक ही बीमारी के लिए 3-4 बार अस्पताल बुलाकर अलग-अलग जांचें कराने के मामले सामने आए हैं। प्रारंभिक तौर पर इन मामलों में अधिक क्लेम प्राप्त करने के उद्देश्य से जांचों और दावों को अलग-अलग किए जाने की आशंका है।
उन्होंने बताया कि आरजीएचएस के सतत डेटा विश्लेषण में एक माह में 238 लाभार्थियों से जुड़े 479 प्रकरण सामने आए हैं। प्रदेश के करीब 50 अस्पतालों और 60 चिकित्सकों की भूमिका जांच के दायरे में आई है। जोधपुर, जयपुर, उदयपुर और अलवर में ऐसे प्रकरण सर्वाधिक सामने आए हैं। आरजीएचएस की परियोजना अधिकारी डॉ. निधि पटेल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि जांचों को अलग-अलग कराने के कारण मरीजों को अनावश्यक रूप से बार-बार अस्पताल आना पड़ा। इनमें महिलाओं और बुजुर्ग मरीजों को भी जांच के नाम पर कई बार अस्पताल बुलाया गया। इससे मरीजों को अनावश्यक परेशानी होने के साथ ही योजना की व्यवस्था के दुरुपयोग की आशंका उत्पन्न हुई है।
उन्होंने बताया कि आरजीएचएस द्वारा सभी मामलों की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी अस्पताल या चिकित्सक द्वारा अधिक क्लेम प्राप्त करने अथवा प्री-ऑथराइजेशन से बचने के लिए जानबूझकर जांचों या दावों को विभाजित करना पाया जाता है, तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। आरजीएचएस का उद्देश्य मरीजों को अनावश्यक जांच और परेशानी से बचाने के साथ-साथ योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकना है।
















