28 जुलाई को मनाया जाने वाला “विश्व हेपेटाइटिस दिवस” हमें “खामोश महामारी” के खिलाफ जगाने के लिए है। एक बालरोग विशेषज्ञ के रूप में मैं रोज देखता हूँ कि समय पर जानकारी और टीका कितनी जानें बचा सकता है।
बच्चों में हेपेटाइटिस - मुख्य खतरे
हेपेटाइटिस मतलब लीवर की सूजन। बच्चों में 5 मुख्य प्रकार हैं – A, B, C, D और E।
हेपेटाइटिस A और E सबसे बड़े “culprit” हैं। ये दूषित पानी, बर्फ, कटा फल और गंदे हाथों से फैलते हैं। मानसून में इसके केस बहुत बढ़ जाते हैं। बुखार, उल्टी, पीलिया, पेट दर्द और थकान इसके आम लक्षण हैं। हेपेटाइटिस E गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के लिए खासतौर पर खतरनाक हो सकता है। हेपेटाइटिस B और C खून, बिना sterilized सुई या माँ से बच्चे को लग सकते हैं। ये शुरू में लक्षण नहीं देते पर लीवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं। अच्छी खबर ये है कि 90% केस समय पर जांच और बचाव से रोके जा सकते हैं।
रोकथाम ही सबसे बड़ा इलाज है
1. टीकाकरण
हेपेटाइटिस B का टीका राष्ट्रीय टीकाकरण में है। जन्म के 24 घंटे में पहला डोज जरूरी है। हेपेटाइटिस A का टीका भी अब आसानी से उपलब्ध है। 1 साल की उम्र के बाद 2 डोज लगवाने की मैं सभी माता-पिता को सलाह देता हूँ। ये स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए बहुत जरूरी है।
2. स्वच्छता - खासकर A और E के लिए
सिर्फ उबला/फिल्टर पानी पिएं। बाहर का कटा फल, पानी वाली चीजें और कच्चा खाना avoid करें। खाने से पहले और टॉयलेट के बाद 20 सेकंड हाथ धोना सबसे जरूरी है।
3. सुरक्षित चिकित्सा
टीका और इलाज में हमेशा नई सुई का उपयोग हो।
इस साल की थीम : “Let’s Break It Down” जांच, इलाज और कलंक की दीवार तोड़नी है। हेपेटाइटिस कोई शर्म की बात नहीं, एक संक्रमण है जिसका इलाज है।
मेरी अपील : अगर बच्चे को 2 हफ्ते से ज्यादा थकान, भूख न लगना, या आंखें पीली हों तो LFT टेस्ट जरूर कराएं। आज संकल्प लें – हर बच्चे को A और B दोनों का टीका, हर घर में साफ पानी। क्योंकि स्वस्थ लीवर = स्वस्थ बचपन। -डॉ. श्याम अग्रवाल, बाल रोग विशेषज्ञ, बीकानेर













