बीकानेर Abhayindia.com विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 के अंतिम दिवस पर गुरुवार को डॉ. श्याम अग्रवाल चिल्ड्रन हॉस्पिटल में स्तनपान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई माताओं और उनके परिवारों को स्तनपान के महत्व, सही तकनीक और इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में जागरूक करना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद् डॉ. अल्का डोली पाठक ने की। मुख्य अतिथि डॉ. मधु खत्री, डॉ. आकांक्षा अग्रवाल, शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक डॉ. सोनम राय और वरिष्ठ पत्रकार शिवकुमार सोनी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता से हुई। माताओं से स्तनपान से जुड़े सवाल पूछे गए। सही उत्तर देने वाली माताओं को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में दीपिका ने सबसे तेज और सही उत्तर देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। दीपिका ने सभी उपस्थित माताओं को स्तनपान जारी रखने की शपथ भी दिलाई।
विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण संदेश
डॉ. श्याम अग्रवाल ने कहा कि “मां का दूध ही शिशु का संपूर्ण आहार है। जन्म से 6 महीने तक बच्चे को केवल मां का दूध ही देना चाहिए। इस दौरान किसी अन्य पूरक आहार की जरूरत नहीं होती। स्तनपान से बच्चों में संक्रमण, मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप का खतरा कम होता है।”
डॉ. आकांक्षा अग्रवाल ने बताया कि “स्तनपान कराने वाली माताओं में स्तन कैंसर, डिम्बग्रंथि कैंसर, मोटापा और मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।”
डॉ. मधु खत्री ने कहा कि “समाज और परिवार को स्तनपान कराने वाली हर महिला का सम्मान करना चाहिए और उसे पूरा सहयोग देना चाहिए।”
डॉ. अल्का डोली पाठक ने कहा कि “बच्चों को स्वस्थ रखने में सिर्फ डॉक्टर ही नहीं, माता-पिता की जीवनशैली भी अहम भूमिका निभाती है।”
डॉ. सोनम राय ने बच्चों की समय पर देखभाल और ओरल हाइजीन के महत्व पर प्रकाश डाला।
विशेषज्ञों ने बताया कि 6 महीने बाद स्तनपान के साथ दाल-चावल, दलिया, खिचड़ी, रोटी और दही जैसे पूरक आहार दिए जा सकते हैं। लेकिन, 1 साल से पहले शिशु को गाय-भैंस का दूध, फॉर्मूला मिल्क या चाय नहीं देनी चाहिए। शिशु के आहार को लेकर अंतिम निर्णय हमेशा चिकित्सक की सलाह से ही लें। वरिष्ठ पत्रकार शिवकुमार सोनी ने कहा कि स्तनपान जागरूकता सिर्फ 7 दिन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। बाल रोग विशेषज्ञों, पैरामेडिकल स्टाफ और परिवार के सदस्यों को मिलकर इसे बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कार्यक्रम का समापन “मां का दूध सर्वोत्तम है, यह अमृत है” के संदेश के साथ किया।
















