पांच दिनों के दीपोत्‍सव में गोमाता के पंचगव्यों के उपयोग से प्राणवायु आरोग्‍य में मिलेगा ये लाभ…

गौशाला
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बीकानेर Abhayindia.com भगवान धन्वन्तरि के प्राकट्य दिवस की खुशी के साथ दीपावली का प्रारंभ होता है। आरोग्य के प्रतीक भगवान धन्वन्तरि एवं वेदलक्षणा गोमाता का धरती अवतरण सम्पूर्ण संसार को आरोग्य प्रदान करने के लिए हुआ था। भगवान धन्वन्तरि चिकित्सा जगत के पिता कहलाते हैं। वेदलक्षणा गोमाता को घूमताफिरता चिकित्सालय कहते हैं। जिनके पंचगव्य पंचमहाभूतों को पोषण प्रदान करता है एवं मनुष्‍य को आरोग्य प्रदान करता है। इसलिये भगवान धन्वन्तरि के प्राकट्य दिवस को वेदलक्षणा गोमाता के गोघृत से दीपक जलाकर दीपोत्सव प्रदान करने का विधान है। जो पांच दिवस तक निरन्तर चलता है। गोघृत का दीपक जलना एक संक्षिप्त यज्ञ करने के समान होता है। इससे वातावरण में प्राणवायु की वृद्धि होती है। प्राणवायु आरोग्य प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।

इस समय गोमाता के घृत से बनी मिठाईयों का उपयोग करना चाहिए जिससे शरीर में बल की वृद्धि व ओज का प्राकट्य होता है तथा चित की शुद्धि होती है। इस पांच दिन के कार्य काल में व्यक्ति एकदूसरे से वैरभाव भूलकर पुनः स्नेहपूर्ण जीवन जीने की शुरुआत करते हैं इससे भाईचारा व अपनत्त्व बढता है। यह पर्व मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामजी के विजय पर्व के रुप में मनाते हैं। इस पर्व में रोग पर विजय प्राप्त कर आरोग्य होना कहलाता है।

वर्तमान दीपावली कहीं रोगों का कारण तो नहीं

वर्तमान दीपावली में भगवान धन्वन्तरि का अवतरण खाली नजर आता है। भगवान धन्वन्तरि आरोग्य के देवता कहलाते हैं। परन्तु, अब धन्वन्तरि जयंती ने भी धनतेरस का रूप ले लिया है। इस दिन स्वास्थ्य रुपी धन का महत्व न होकर भौतिक धन का महत्व रह गया है। इसलिये इस दिन आरोग्य प्रदान करने वाली औषधि की जगह सोनाचांदी व अन्य उपकरणों का महत्व होने लगा है। इस दिन गोमाता के गोघृत से बनी मिठाई की जगह सिन्थेटिक मावा की मिठाई व रोग उत्पन्न करने वाले व्यंजनों का महत्व बढ गया है। इस दिन गोघृत के दीपकों की जगह विद्युत उपकरण व कार्बन डाईऑक्साईड व हानिकारक गैस बनाने वाले पटाखों का उपयोग बढ रहा है। जिससे दीपावली के दिन शहरों के वातावरण में कार्बन डाईऑक्साईड के बादलों को शाम के समय देखा जा सकता है। जिससे अनेक प्रकार के श्‍वांस संबंधी रोग होते हैं।

आज की आवश्‍यकतागोव्रती दीपावली

इस बार आप और हम सब मिलकर भगवान धन्वन्तरि के प्राकट्य दिवस से दीपावली तक वेदलक्षणा गोमाता के गोगव्यों का उपयोग कर गोवृति दीपावली मनायेंगे। इस दिन गोमाता के गोघृत के दीपक एवं गोमाता के गोघृत से बनी मिठाईयों का उपयोग परिवार में करेंगे। इसी संकल्‍प के साथ

वैद्य श्‍यामसिंह राजपुरोहित, बीकानेर

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