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जीएसटी विभाग की बड़ी कार्रवाई, चार प्रतिष्ठानों में सामने आईं करीब 1.40 करोड़ रूपए की कर अनियमितताएं

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जयपुर Abhayindia.com राज्य में जीएसटी नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने तथा कर अपवंचन एवं गलत तरीके से लिए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा सर्वे एवं निरीक्षण की कार्रवाई लगातार तेज की जा रही है। इसी क्रम में विभागीय अधिकारियों द्वारा जयपुर, बाड़मेर एवं किशनगढ़ में विभिन्न प्रतिष्ठानों पर की गई कार्रवाई में जीएसटी से संबंधित महत्वपूर्ण अनियमितताएं सामने आई हैं। संबंधित करदाताओं द्वारा कार्रवाई के दौरान 1.16 करोड़ रुपए से अधिक की राशि स्वेच्छा से जमा एवं रिवर्स की गई है।

जयपुर के जनता कॉलोनी स्थित महारानी ट्रैवल्स पर 20 अगस्त को निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान लेखा पुस्तकों, रिटर्न एवं अभिलेखों की जांच में 96,93,048 रुपए के IGST इनपुट टैक्स क्रेडिट से संबंधित अनियमितता सामने आई। विभाग द्वारा प्रकरण के प्रावधानों एवं परिणामों से अवगत कराए जाने के बाद करदाता ने उक्त राशि का रिवर्सल करते हुए 96,93,048 रुपए की राशि 26 अगस्त को स्वैच्छिक रूप से जमा की।

बाड़मेर स्थित लूदार कंस्ट्रक्शन कंपनी के व्यावसायिक परिसर में 24 अगस्त को निरीक्षण एवं सर्च की कार्रवाई में फर्म द्वारा ऐसे करदाता से इनपुट टैक्स क्रेडिट लिए जाने की जानकारी सामने आई, जिसका पंजीयन प्रारंभ से ही रद्द था तथा जिसे गैर-मौजूद करदाता के रूप में चिन्हित किया गया था। विभागीय अधिकारियों द्वारा विसंगतियों से अवगत कराए जाने के बाद करदाता ने 2,55,405 रुपए की राशि 26 अगस्त को स्वैच्छिक रूप से जमा की। कार्रवाई के दौरान कोई माल अथवा दस्तावेज जब्त नहीं किए गए। प्रकरण में आगे की जांच जारी है।

जयपुर के औद्योगिक क्षेत्र कानोता स्थित हाशमी ओवरसीज एलएलपी पर 20 अगस्त को निरीक्षण एवं सर्च की कार्रवाई के आधार पर फर्म द्वारा माल परिवहन के लिए ट्रकों की आपूर्ति, संबंधित सेवाओं को छूट प्राप्त कारोबार के रूप में दर्शाने तथा परिसर किराये पर देने से संबंधित लेन-देन की जांच की गई। जांच में ट्रकों से संबंधित आईटीसी को अन्य सेवा से प्राप्त आउटपुट टैक्स के समायोजन में उपयोग किए जाने तथा निर्माण संबंधी खर्चों पर अवरुद्ध आईटीसी के संभावित उपयोग से संबंधित विसंगतियां भी सामने आईं।

प्रकरण में 21,98,505 रुपए की संभावित राजस्व देनदारी, जिसमें 13,49,910 रुपए कर तथा 8,48,595 रुपए ब्याज शामिल है, चिन्हित की गई। कार्रवाई के दौरान करदाता ने 6,44,308 रुपए की राशि 21 अगस्त को स्वैच्छिक रूप से जमा की। कोई माल अथवा दस्तावेज जब्त नहीं किया गया। शेष रिकॉर्ड की जांच एवं अतिरिक्त कर एवं ब्याज अथवा अपात्र आईटीसी की संभावना के संबंध में जांच जारी है।

किशनगढ़ के ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया स्थित श्री यमुना महारानी ग्रेनाइट्स का 27 अगस्त को सर्वे किया गया। फर्म के आईटीसी के बीच अंतर की जांच में वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 3 लाख रुपए तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 16.08 लाख, कुल 19.08 लाख रूपए की संभावित विसंगति सामने आई। विभागीय कार्रवाई के बाद करदाता द्वारा 11.25 लाख रूपए की राशि स्वैच्छिक रूप से जमा की गई। इसमें वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 1.49 लाख रूपए तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए क्रमशः 5 लाख एवं 4.75 लाख रूपए की राशि शामिल है।

वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा रिटर्न विश्लेषण एवं फील्ड इंटेलिजेंस के आधार पर संदिग्ध लेन-देन एवं आईटीसी के मामलों की लगातार जांच की जा रही है। विभाग का उद्देश्य वास्तविक कर देनदारी सुनिश्चित करने के साथ-साथ गलत तरीके से आईटीसी लेने, कर दायित्व छिपाने तथा जीएसटी प्रावधानों के उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई करना है। अधिकारियों द्वारा स्पष्ट किया गया है कि जांच में सामने आने वाली प्रत्येक अनियमितता के अनुसार नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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