बीकानेर Abhayindia.com स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान केन्द्र सभागार में शुक्रवार को अतिरिक्त निदेशक कृषि (विस्तार) हिरेन्द्र शर्मा, उपनिदेशक कृषि जयदीप दोगने तथा क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ भूपेंद्र सिंह की अध्यक्षता में कृषि विभाग की मासिक तकनीकी कार्यशाला एवं खण्डीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में बीकानेर जोन-1 सी जैसलमेर, चूरू एवं बीकानेर मुख्यालय के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में खरीफ मौसम की फसल स्थिति, बीज एवं उर्वरक वितरण, हरियालो राजस्थान, विभागीय योजनाओं की प्रगति पर विस्तृत समीक्षा की गई।
तकनीकी सत्र में कृषि वैज्ञानिकों ने खरीफ फसलों मूंगफली, कपास, बाजरा, मूंग, उड़द एवं तिलहन फसलों की उन्नत खेती, बीजोपचार, पोषण प्रबंधन तथा कीट नियंत्रण विषयों पर पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी। क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ भूपेंद्र सिंह की अध्यक्षता में आयोजित तकनीकी सत्र में वैज्ञानिकों ने कृषि एवं उद्यानिकी तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। अतिरिक्त निदेशक हिरेन्द्र शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कृषि, उद्यान, स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक परस्पर कर कृषक हित में ओर बेहतर कार्ययोजना तैयार कर विभागीय योजनाओं से किसानों को लाभान्वित किया जाना सुनिश्चित करें साथ ही विभिन्न विभागीय योजनाओं में लंबित देनदारी के भुगतान हेतु प्राप्त बजट राशि का नियमानुसार किसानों को अविलंब भुगतान किया जाना सुनिश्चित करें।
उन्होंने उर्वरकों का वितरण निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने हेतु निर्देश दिए। जैविक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ जैविक व प्राकृतिक खेती पर जोर देने हेतु निर्देश दिए। डीएपी के विकल्प के रूप में एसएसपी व यूरिया तथा अन्य उर्वरक के उपयोग को बढ़ावा दिया जावें। पेस्टीसाइड, उर्वरक एवं बीज नमूनों की गुणवत्ता जांच के लिए लक्ष्य अनुसार सैंपलिंग करने और नॉन-स्टैंडर्ड नमूने मिलने पर संबंधित फर्मों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई एवं कोर्ट केस दर्ज कराने के निर्देश भी दिए। बैठक में “हरियालो राजस्थान” अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए शर्मा ने कहा कि कृषि एवं उद्यानिकी विभाग को 58 हजार पौधरोपण का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जिसे शत-प्रतिशत पूरा करने के लिए सभी अधिकारी सक्रियता से कार्य करें। उन्होंने पौधरोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण और नियमित मॉनिटरिंग पर भी जोर दिया।













