जयपुर Abhayindia.com स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित 2026 कॉमनवेल्थ खेलों की महिला 70 किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली राजस्थान की बेटी अरुंधति चौधरी की कहानी केवल जीत की नहीं, बल्कि संघर्ष की भी है। बॉक्सिंग के दौरान दोनों कलाइयों में उसके गंभीर चोट लगी। ऑपरेशन कर दोनों हाथों में प्लेट डालनी पड़ी। एड़ी में फ्रैक्चर हुआ। कई बार लगा कि कॅरियर रुक जाएगा, लेकिन उसने हार नहीं मानी। सबसे कठिन दौर तब आया जब पेरिस ओलंपिक क्वालीफाई के दौरान उसकी मां सुनीता चौधरी आइसीयू में भर्ती थीं। एक तरफ मां की जिंदगी की चिंता, दूसरी ओर देश के लिए मुकाबला। मानसिक तनाव के बावजूद अरुंधति रिंग में उतरी और पूरी ताकत से लड़कर जीती।
कोटा की इस मुक्केबाज अरुंधति केवल खेल में ही नहीं, पढ़ाई में भी हमेशा अव्वल रही। स्कूली शिक्षा के समय भी वह जम्प गेम, कॉपी बैलेंस प्रतियोगिता में अव्वल रही। फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में भी वह हिस्सा लेती थी। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उसने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से स्नातक किया। दो वर्ष पहले वह भारतीय सेना में हवलदार बनी और अब सेना की जिम्मेदारियों के साथ देश के लिए पदक जीत रही हैं। पिछले दस महीनों में अरुंधति ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया। फेडरेशन कप, यूथ वर्ल्ड कप, राष्ट्रीय चैंपियनशिप, बॉक्सो कप इंटरनेशनल और एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद अब कॉमनवेल्थ गेम्स में भी गोल्ड से केवल एक जीत दूर हैं। आपको बता दें कि अरुंधति ने फाइनल में इंग्लैंड की चैंटेल रीड को एकतरफा अंदाज में हराकर गोल्ड अपने नाम किया।
अरुंधति के कोच अशोक गौतम के अनुसार, अरुंधति बचपन से पढ़ाई और खेल दोनों में अव्वल थी। एक निजी स्कूल में वह बास्केटबॉल टीम की कप्तान थी। जिला और राज्य स्तर तक खेल चुकी अरुंधति ने एक दिन कहा कि उसे कोई व्यक्तिगत खेल खेलना है। पिता सुरेश चौधरी ने उसे कुश्ती, वेटलिफ्टिंग और बॉक्सिंग जैसे खेलों के बारे में बताया। ‘बॉक्सिंग’ शब्द सुनते ही अरुंधति की आंखों में चमक आ गई। उसी दिन उसने तय कर लिया कि अब वह बॉक्सर बनेगी।















