राजस्थान: निकाय चुनाव को लेकर बीजेपी की बैठक, राजे के अलावा ये नेता हुए शामिल

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जयपुर। आगामी निकाय चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की एक उच्‍च स्‍तरीय बैठक हुई जिसमें प्रत्याशियों के नामों पर विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के अलावा के अलावा कई नेता शामिल हुए।

पार्टी प्रवक्‍ता के अनुसार प्रदेश कार्यालय में निकाय चुनावों को लेकर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां, केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, राष्ट्रीय मंत्री अलका गुर्जर, प्रदेश संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर व नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया ने निकायों के प्रभारियों, जिलाध्यक्षों एवं जिला प्रभारियों के साथ बैठक की।

बैठक के बाद पूनियां ने कहा कि पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता पूरी एकजुटता के साथ निकाय चुनाव की तैयारियों में जुट गये हैं। कांग्रेस सरकार ने परिसीमन व सरकारी तंत्र का दुरूपयोग कर षड्यंत्र करने की कोशिश की, जिसे भाजपा कार्यकर्ता अपने परिश्रम से सफल नहीं होने देंगे।

उन्‍होंने कहा, ‘‘कांग्रेस सरकार के दो साल के कुशासन में भ्रष्टाचार, बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था, बेरोजगारी, सम्पूर्ण किसान कर्जमाफी ये प्रमुख मुद्दे हैं, खासतौर पर शहरी निकायों में विकास कार्य ठप हैं, एक भी नया टेण्डर नहीं होना गहलोत सरकार की कमजोरी का प्रत्यक्ष प्रमाण है।’’

वहीं भाजपा किसान मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष हरिराम रणवां ने कृषि सुधार कानूनों पर एक बयान में कहा, ‘‘हम उच्‍चतम न्‍यायालय का सम्मान करते हुए उनके निर्णय को स्वीकार करते हैं एवं आशा करते हैं कि आंदोलनरत किसान संगठन भी इसे स्वीकार करेंगे।’’

दरअसल, वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव संभावित हैं। लेकिन प्रदेश भाजपा में राजे और पूनिया खेमे के बीच की गुटबाजी गाहे-बघाहे बाहर निकलकर सामने आ रही है। ऐसे में दोनों कथित गुटों में इस बात को लेकर सस्पेंस बना हुआ है कि राष्ट्रीय नेतृत्व इस बार किस नेता के चेहरे पर चुनाव मैदान में उतरेगा।

भाजपा नेता भले ही अंदरूनी गुटबाजी से बार-बार इनकार कर चुके हैं लेकिन समय-समय पर राजे और पूनिया खेमे की गुटबाजी सामने आती रही है। हाल ही में राजे समर्थकों और पूनिया समर्थकों के अलग-अलग मंच तैयार होने और पदाधिकारी तक नियुक्त होने की बातें सामने आईं हैं। दोनों गुटों के समर्थक अपने-अपने नेताओं को प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर देख रहे हैं।

दो भाइयों की कहानी पीयूष शंगारी की जुबानी...

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