








बीकानेर Abhayindia.com सीपीआर यानी कि कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन ऐसी जीवनरक्षक तकनीक है जिसे हर व्यक्ति को सीखना चाहिए। अचानक कार्डियक अरेस्ट या सांस रुकने की स्थिति में यदि तुरंत सीपीआर दी जाए, तो कुछ ही मिनटों में किसी की जान बचाई जा सकती है। इसके तहत सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज एवं पीबीएम हॉस्पिटल के एनेस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कांता भाटी ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ केवल ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि क्रिटिकल केयर, पेन मैनेजमेंट और एमर्जेन्सी लाइफ सपोर्ट में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने बताया कि विभाग के चिकित्सकों द्वारा सीपीआर की लाइव डेमो प्रस्तुति 13 से 17 अक्टूबर को की गई जिसमें अलग अलग दिन उपस्थित विभिन्न सुपर स्पेशलिटी विभाग के रेसिडेंट डॉक्टर, इंटर्न डॉक्टर, नर्सिंग विद्यार्थियों, नर्सिंग स्टाफ, गार्ड एवं जनसाधारण को यह सिखाया गया कि आपातकालीन परिस्थिति में किस प्रकार तुरंत चेस्ट कम्प्रेशन देकर किसी व्यक्ति को बचाया जा सकता है। इस दौरान हैंड्स ऑन प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी डमी के माध्यम से दी गई। साथ ही “हर हाथ CPR के लिए तैयार” का शपथ संकल्प लिया गया जिसमे प्रिंसिपल डॉ एसके वर्मा सहित चिकित्सक और पीजी रेसिडेंट मौजूद रहे।
आपको बता दें कि 6 अक्टूबर ईथर डे जो विश्व एनेस्थीसिया दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन 1846 में ईथर का पहली बार बेहोशी में सफल प्रयोग किया गया जिसमें सर थॉमस ग्रीन मार्टन ने दर्दरहित सर्जरी करवाई। एनेस्थीसिया दिवस की शाम में ISA बीकानेर सिटी ब्रांच के सभी निश्चेतन विशेषज्ञयो ने वैज्ञानिक संगोष्ठी (CME) में नई एनेस्थीसिया इनहेलेशनल गैस की विशेषताओं, सुरक्षा एवं रोगी की रिकवरी पर इसके प्रभाव की चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में ISA बीकानेर सिटी ब्रांच के डॉ ओपी श्रीवास्तव, डॉ दाधीच, डॉ साधना जैन, डॉ अनीता, डॉ कांता, डॉ सोनाली, डॉ सतनाम, डॉ विजय, डॉ किवी, डॉ जिनेश एवं अन्य सभी सरकारी और निजी निश्चेतन विशेषज्ञ उपस्थिति रहे।


