Friday, April 24, 2026
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बीकानेर की राजनीति : बगावत का खतरा भांप चुकी है भाजपा-कांग्रेस

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बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज) चुनावी सरगर्मियों के बीच जिले की सातों विधानसभा सीटों पर ताजा समीकरणों को देखते हुए भाजपाकांग्रेस इस बार नए चेहरों पर भी दांव खेल सकते हैं, लेकिन इन हालातों में दोनों पार्टियों को अपने ही बागियों से बगावत का भय भी सता रहा है। क्योंकि पिछले चुनावों में जिले की नोखा और लूनकरणसर सीट पर भाजपा बागी प्रत्याशी की मार झेलनी पड़ी थी। जिससे पार्टी को नेगेटिव परिणाम के रूप में हार का सामना करना पड़ा।

इस बार भी जिले की चार सीटों पर भाजपा कांग्रेस को बागियों का सामना करना पड़ सकता है, इनमें भाजपा को लूनकरणसर, श्रीडूंगरगढ़ तथा बीकानेर पश्चिम तथा कांग्रेस को श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर पूर्व, लूनकरणसर और खाजूवाला में बगावत की मार झेलनी पड़ सकती है। हालांकि अभी टिकट वितरण को लेकर स्थिति साफ नहीं हुई है, लेकिन दावेदारों की होड़ मची है और हर प्रत्याशी विधानसभा वार स्वयं को मजबूत दावेदार के रूप में पेश करने की कवायद में जुटा है। इस उठापटक के बीच दोनों ही दलों के बगावती प्रत्याशियों के बारे में टिकट वितरण के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगा। ऐसे में भाजपा और कांगे्रस के आला कमान समेत स्थानीय फीड बैक टीम इसी कवायद में जुटी रहेंगी कि किसी भी स्थिति में बागी प्रत्याशी उनके लिए ही आत्मघाती साबित हो।

चुनावी लिहाज से खास नजर बीकानेर पूर्व विधानसभा पर रहेगी, क्योंकि भाजपा को जिले में इसी विधानसभा में सबसे बड़ी जीत और कांगे्रस को पटखनी मिली थी और इस बार कांग्रेस के कई दावेदार टिकट नहीं मिलने की सूरत में बागी कर चुनावी मैदान में उतरने के लिये तैयार है। इसके अलावा नोखा विधानसभा क्षेत्र भी दोनों दलों के लिए काफी माथापच्ची वाला रहेगा, क्योंकि यहां कन्हैयालाल झंवर तीसरी ताकत के रूप में मजबूती से चुनावी मैदान में उतरने के लिये तैयार है।

इनकी चुनावी मुहिम को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस के रणनीतिकारों की हवाईया अभी से उड़ी हुई है। ऐसे ही हालात लूनकरणसर में देखने को मिल रहे है, जहां कांग्रेस की ओर से दमदार दावेदारी के रूप में जिला प्रमुख सुशीला सींवर, राजेन्द्र मूंड शामिल है, जबकि पार्टी टिकट पूर्व मंत्री विरेन्द्र बेनीवाल को दिया जा सकता है। ऐसे में कांग्रेस को बग़ावत का सामना करना पड़ सकता है। वहीं भाजपा की ओर से सुमित गोदारा और सहीराम दुसाद के बीच टिकट की दावेदारी को लेकर चल रही उठापटक में सहीराम का पत्ता साफ होने पर बागी बनकर मैदान में उतर सकते हैं।

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