बीकानेर भाजपा आइसोलेशन में, ऑनलाइन मोड पर चल रही पार्टी

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बीकानेर (आचार्य ज्योति मित्र) कोरोना में सेल्फ आइसोलेशन को स्वास्थ्य के लिए ठीक माना गया। इसे ब्रह्म वाक्य मानकर बीकानेर के भाजपा नेताओं ने पिछले एक अरसे से अपने आपको आइसोलेटकर रखा है। पार्टी के अधिकतर काम ऑनलाइन ही चल रहे हैं। जमीन पर संघर्ष बीते दिनों की बात हो गई है। सोशल मीडिया पर अपनी नियुक्ति के समाचार अपलोड करना व उसके बाद लाइक्स कॉमेंट की गणना करने तक ही भाजपा के कर्त्‍ताधर्ताओं की राजनीति सिमट कर रह गई है। राजनीति के जानकारों की नजर में इससे भाजपा का राजनैतिक स्वास्थ्य बिगड़ गया है। राजस्थान में भाजपा को विपक्ष में आए एक अरसा बीत चुका है। ज्‍वलंत मुद्दों पर प्रदेश से लेकर जिला स्तर पर मौन रह जाने से लगता है भाजपाई विपक्ष की राजनीति भूल गए है।

कोरोनाकाल में बीकानेर जिले में कई बड़ी घटनाएं हुई। वर्षों से नौकरशाही की हठधर्मिता से फाइलों में बंद मुद्दों को उठाने में शर्म करती रही। बिजली पानी जैसे सीधे तौर पर जनता से जुड़े मुद्दों पर भी बीकानेर भाजपा कांग्रेस के मंत्रियों को घेरने में नाकाम रही है। कई बार तो जिले के प्रभारी मंत्री आए व चले गए किसी भाजपाई ने जनसमस्याओं को लेकर एक ज्ञापन तक देने की जहमत नहीं उठाई।

हाल में बीकानेर में हुई मारपीट व फायरिंग के बाद राष्ट्रवादी संगठनों के नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इक्केदुक्के लोगों को छोड़कर पूरी भाजपा निष्क्रिय रही। इसी दिन पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी ने समय पर कलेक्ट्री पहुंचकर प्रशासन को आड़े हाथों लिया व इन नेताओं की रिहाई का मार्ग प्रशस्त किया। हाल ही में राज्य सरकार की कैबिनेट मीटिंग में लिए एक निर्णय के अनुसार गोचर, ओरण व चरागाह भूमि पर पुराने कब्जों को नियमित कर पट्टे देने का निर्णय लिया गया। भाजपा का इस मुद्दे पर मौन रह जाना पार्टी के शुभचिंतकों को अखर रहा है। इसके उलट एक अरसे से भाजपा से नाता तोड़ चुके भाटी ने इस मुद्दे को हाथों हाथ लिया। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस निर्णय को वापस लेने की मांग कर दी। मांग न माने जाने पर तगड़े आंदोलन की चेतावनी दे डाली। राजनीति में टाइम मैनेजमेंट की गहरी समझ रखने वाले इस खांटी नेता ने सरह नथानिया गोचर भूमि पर अपना धरना शुरू कर दिया। भाटी ने एलान किया है कि यदि समय रहते सरकार ने इस निर्णय को वापिस नहीं लिया तो वे आमरण अनशन करेंगे। भाटी ने इस धरने में सभी गौ प्रेमियों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आने का आह्वान किया है। जनसंघ के जमाने से चुनावों में गाय को मुद्दा बनाने वाली भाजपा अब गाय की जमीन के मुद्दे पर भी मौन है। राजनीति के पंडितों का कहना है कि इस मुद्दे पर भाजपा की यह चुप्पी उसके परम्परागत वोटों को उससे दूर कर सकती है।

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