बीकानेर Abhayindia.com बीकानेर नगर निगम इन दिनों राजनीति का सबसे बड़ा अखाड़ा बनता नजर आ रहा है। इस अखाड़े में चल रहे दांव–पेच से नुकसान आखिरकार आमजन का ही हो रहा है। बात चाहे शहर की सफाई व्यवस्था की हो या पट्टा वितरण की। आपसी विवाद में सारे काम लंबे समय से प्रभावित हो रहे हैं। इसके बावजूद महापौर सुशीला कंवर राजपुरोहित और निगम के अधिकारियों के बीच अहम का टकराव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।
ताजा मामला पट्टा वितरण को लेकर है। जानकारों की मानें तो पट्टों की पत्रावलियों को लेकर महापौर और अधिकारियों में विवाद खींचता ही जा रहा है। महापौर पर आरोप है कि उन्होंने सचिव हंसा मीणा द्वारा संधारित की गई भूमि शाखा की पत्रावलियों पर पक्षपात करना शुरू कर दिया हैं। महापौर का कहना है की सचिव हंसा मीणा द्वारा नियम विरुद्ध अभ्यर्पण जारी कर राशि एवं मूल दस्तावेज जमा किए गए थे। जिस पर उच्च न्यायालय ने रोक लगाते हुए, प्राधिकृत अधिकारी एवं चेयरमैन के अनुमोदन के बाद जारी करने की बात कही। जिसके बाबत हंसा मीणा को नोटिस जारी करने का जिक्र किया गया था। इसके जवाब में आयुक्त ने लिखा था “उक्त कार्यवाही विभाग की जो नियमानुसार की जानी हैं, आप राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना में उक्त पत्रावली पर 3 कार्य दिवस में सहमति/असहमति (कारणों सहित) स्पष्ट करें।” उक्त पत्रवालियां दिनांक 21 मार्च 2023 को महापौर निवास को भेजी गई थी जो आज तक वापस कार्यालय नही आई हैं। बताया जा रहा है कि महापौर द्वारा कार्यालय में एक भी पत्रावली का अवलोकन नही किया जाता, समस्त पत्रावली उनके निवास स्थान पर जाती हैं और 4-5 दिन बाद वापिस आ जाती हैं। महापौर की ओर से किसी पत्रावली का एक–एक शब्द जांचा जाता है तो वहीं, कुछ पत्रावलियां अधूरी ही उसी दिन स्वीकृत होकर आ जाती हैं और उसके अगले दिन पट्टा जारी हो जाता हैं।
बीकानेर पश्चिम की फाइलों पर ही आपत्ति क्यों…
जानकार यह भी बताते हैं कि नगर निगम में पट्टों को लेकर बीकानेर पूर्व और बीकानेर पश्चिम क्षेत्र को लेकर भी भेदभाव बरता जा रहा है। महापौर के पास लंबित पत्रावलियों में से अधिकांश बीकानेर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र की हैं। जबकि बीकानेर पूर्व क्षेत्र की पत्रावलियां एक ही दिन में बिना आपत्ति के अनुमोदन होकर आ जाती हैं। इससे पहले भी महापौर ने एक 69 क की पत्रवाली पर मार्गाधिकार का आक्षेप लगाया जो नियमों में नही हैं लेकिन एक अन्य के मामले में 14 फीट सड़क पर ही कब्जा नियमन का पट्टा जारी कर दिया हैं। इससे कार्यप्रणाली पर सवाल उठने भी लाजमी है। उक्त पत्रावली की जानकारी एक सामाजिक कार्यकर्ता ने आरटीआई के तहत मांगी थी, लेकिन उसे जवाब देने से मना कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि नगर निगम आयुक्त ने कुछ महीनों पहले आम सूचना प्रकाशित कर बल्लभ गार्डन का समस्त क्षेत्र सीलिंग के अंतर्गत का क्षेत्र माना था जबकि अभी कुछ दिन पहले कोई 6 फाइल्स को लेकर बिना विभागीय कार्यवाही पूर्ण किए, बिना पटवारी रिपोर्ट, तकनीकी रिपोर्ट के ही पत्रवाली का अनुमोदन कर दिया गया। लंबे समय से लंबित पत्रावली पर मात्र 6 दिन में पट्टा दे दिया गया। जानकारों का कहना है कि निगम में अब तक जारी हुए पट्टों की पत्रावलियों की निष्पक्षता से जांच करानी चाहिए।













