काजू-बादाम को मात दे रहा मरुधरा का सूखा साग, इनके भाव…

sukha saag
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बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज)। मरुधरा में बहुतायत में होने वाले वाले कैर-सांगरी की विदेशों में मांग बढऩे व शीतलाअष्टमी पर घर में बनने वाले ठंडे भोजन के साथ बनने वाले पंचकूटे में इनका उपयोग होने के कारण बाजार में अभी इसके भाव आसमान छूने लगे हैं। मजे कि बात तो यह है कि मरुधरा सूखा साग इन दिनों में काजू-बादाम के भाव को भी मात दे रहा है।

शीतलाअष्टमी पर्व पर ठंडा भोजन में कैर-सांगरी की सब्जी मुख्य रूप से बनती है। सूखे कैर-सांगरी की सब्जी के स्वाद में कोई अंतर नहीं आता हैं। ऐसे में इस सब्जी को ही प्राथमिकता दी जाती है। पंचकूटा के साग में सूखे कैर-सांगरी, कुम्मट, काचरे, साबूत अमचूर, सूखे मेवे आदि डाले जाते हैं। अष्टमी पर अधिकांश घरों में बनने वाली पंचकूटे की सब्जी के कारण भाव आसमान छूने लगे हैं।

फड़ बाजार और बड़ा बाजार की किराना दुकानों में कैर, सांगरी, कुम्मट, काचरे बारह मास मिलते है, लेकिन शीतलाअष्टमी के सीजन में यहां जूनागढ़ की खाई का फुटपाथ सूखे साग का अस्थाई बाजार बन जाता है, जहां सुबह से शाम तक ग्राहकों की भीड़ उमड़ी देखी जा सकती है। बाजार के किराना व्यापारी चांदरतन ने बताया कि शीतला अष्टमी पर सूखे साग की विशेष मांग रहती है। ऐसे में यह महंगी मिल रही है। वहीं कैर-सांगरी की विदेशों के साथ बड़ी होटलों में इसकी मांग बढऩे से इनके भावों में बढ़ोतरी हुई है।

देश-विदेश में होने लगी मांग

मरुधरा में बहुतायत मात्रा में होने वाले कैर-सांगरी की मांग विदेशों में खूब है। इसकी सब्जी बनने के साथ अचार बनाने के भी काम आती है। ऐसे में खाने में स्वादिष्ट व कई दिनों तक खराब नहीं होने के कारण विदेशों व सितारा होटलों में भी इसकी खास डिमांड रहती है। मारवाड़ी परिवारों के लिए यह एक खास व्यंजन हैं।

मुफ्त में मिलती थे कैर-सांगरी

मरुधरा में पैदा होने वाले कैर-सांगरी की सूखी सब्जियों से ग्रामीणों को रोजगार भी मिलता है। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं और पुरुष कैर-सांगरी को एकत्र कर बाजार तक पहुंचाते हैं। कुछ सालों पहले तक गांवों में कैर-सांगरी मुफ्त में मिल जाते थे। अन्य प्रदेशों ओर विदेशों तक जाने से मरुधरा सूखे मेवे के भाव लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

यह चल रहे हैं ताजा भाव (प्रति किलो)

सूखे कैर – 1000 रुपए

सांगरी – 600 रुपए

कुम्मट – 120 रुपए\

गूंदा – 600 रुपए

साबूत अमचूर – 360 रुपए

सूखा काचरा – 150 रुपए

सूखी ग्वारफली – 600 रुपए

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