आईपीएल क्रिकेट सीजन में ‘माल’ कमाने के लिए गुंडों की शरण में गए सटोरिये!

मुकेश पूनिया/बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज)। आईपीएल क्रिकेट शृंखला के आगाज के साथ ही यहां क्रिकेट सट्टेबाजी से करोड़ों की सौदेबाजी का दौर परवान चढऩे लगा है। बड़े सटोरियों ने अबकी बार पुलिस की निगाह से बचने के लिए अपने मुख्य ठिकाने बीकानेर से बाहर बनाए हैं, जबकि बीकानेर में सौदेबाजी के लिए छोटे बुकियों के जरिये अपनी लाईने दी है। पुख्ता खबर है कि इस बार ये सटोरिये अपने काले कारोबार को पंख लगाने के लिए गुंडों की शरण में जा रहा है। इसके लिए बाकायदा एक गुप्त स्थान पर मीटिंग भी रखी गई है।

सूत्रों के मुताबिक, इस मीटिंग में निर्णय लिया गया है कि इस बार क्रिकेट सट्टेबाजी को लेकर विरोधभाषी खबरें प्रसारित करने वाले पत्रकारों और पुलिस के लिये मुखबिरी करने वालों पर गुंडों से हमले कराए जाएंगे। इस मीटिंग में बीकानेर शहर समेत गंगाशहर, भीनासर, नोखा और श्रीडूंगरगढ़ के नामी बुकी शामिल थे।

जानकारी में रहे कि क्रिकेट सट्टा एक सामाजिक अपराध है, लेकिन विडम्बना है कि पिछले दशकभर से बीकानेर क्रिकेट सट्टेबाजी के लिये एशिया का सबसे बड़ा ठिकाना बन रहा है। सट्टेबाजी पर प्रभावी अंकुश लगाना पुलिस के लिये सबसे बड़ी चुनौती होने के बावजूद आईपीएल के पिछले सीजन में क्रिकेट सट्टेबाजी के खिलाफ मीडिया की ओर से चलाई गई मुहिम के बाद पुलिस ने क्रिकेट बुकियों के खिलाफ प्रभावी कार्यवाही की थी। पिछले सीजन में हुई कार्यवाही से आहत होकर की इस बार बीकानेर के तमाम क्रिकेट बुकियों ने इस बार गुंडो का सहारा लेने का निर्णय लिया है, जिससे सामाजिक अपराध के खिलाफ आवाज को दबाया जा सके।

सूत्रों की मानें तो गंगाशहर इलाके के दो नामी बुकियों ने आईपीएल सीजन के लिए अभी पिछले माह ही जयपुर के पॉश अपार्टमेंट में आलिशान फ्लेट किराये पर लिए हैं, जहां दोनों बुकियों ने सट्टेबाजी के लिये हाईटेक सेटअप लगाए है। सूत्रों ने यह भी बताया है कि बीकानेर में बड़े बुकियों का मुंबई, नागपुर और इंदौर से सीधा सम्पर्क रहता है और वे वहां पर सेटिंंग करके लाइन लेते हैं। इस लाइन पर मैच के दौरान पूरे समय भाव व हर क्षण होने वाले उतार-चढ़ाव की स्थिति का पता चलता है। इसी लाइन से सटोरिये यहां खाईबाजी करने के बाद दांव पलटाते हैं।

पुलिस चलायेगी बड़ी मुहिम

इधर, पुलिस ने भी आईपीएल सीजन में बड़े पैमाने पर होने वाली क्रिकेट सट्टेबाजी की रोकथाम तथा सटोरियों के ठिकानों पर कार्यवाही के लिये बड़ी कार्ययोजना बनाई है। इसे लेकर जिला पुलिस के उपाधीक्षकों और थाना प्रभारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियों सौंपी गई है, साथ ही मुखबिर तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।

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