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स्वाइन फ्लू का कहर पूरे उत्तर भारत में, बीकानेर के संदर्भ में जानें डॉ. श्याम अग्रवाल की कलम से…

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प्रिय अभिभावकों, पिछले कुछ दिनों से मेरी बीकानेर की ओपीडी में सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल यही है – “डॉक्टर साहब, कहीं ये स्वाइन फ्लू H1N1 तो नहीं है?” दिल्ली, लखनऊ और देश के कई हिस्सों में इन्फ्लूएंजा और H1N1के केस बढ़ने की खबरों के कारण यह डर स्वाभाविक है। लेकिन, इसी बीच एक बहुत जरूरी बात समझना आवश्यक है।

हर वायरल बुखार H1N1 नहीं होता

बच्चों में सर्दी-जुकाम के लिए सिर्फ H1N1 ही जिम्मेदार नहीं है। इन्फ्लूएंजा, आरएसवी, एडीनोवायरस, राइनोवायरस जैसे दर्जनों वायरस इसी तरह के लक्षण पैदा करते हैं। इसलिए सिर्फ बुखार की ऊंचाई देखकर या खांसी सुनकर “ये H1N1 है” या “ये नहीं है” कहना सही नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी मानता है कि केवल लक्षणों से इन्फ्लूएंजा को दूसरे वायरस से अलग करना कठिन है।

सामान्य वायरल और इन्फ्लूएंजा
में फर्क कैसे समझें?

सामान्य वायरल संक्रमण : धीरे-धीरे शुरू होता है। बुखार, नाक बहना, गले में खराश, हल्की खांसी, शरीर में दर्द। तीन से चार दिन में बच्चा खुद ठीक होने लगता है।

इन्फ्लूएंजा/H1N1 : अचानक तेज बुखार के साथ शुरू होता है। साथ में सूखी खांसी, तेज सिरदर्द, पूरे शरीर और मांसपेशियों में दर्द, बहुत ज्यादा कमजोरी। लेकिन, ध्यान दें – ये लक्षण सौ प्रतिशत H1N1 के ही हैं, ऐसा जरूरी नहीं। यानी तेज बुखार =H1N1 जरूरी नहीं। खांसी = H1N1 जरूरी नहीं। तीन-चार दिन बुखार = H1N1 की पुष्टि नहीं। H1N1 की पुष्टि सिर्फ लक्षणों से नहीं हो सकती। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर बच्चे की उम्र, लक्षण, आसपास बीमारी का चलन और जांच की जरूरत देखकर आरटी-पीसीआर जैसी जांच की सलाह देते हैं।

कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएं - 
खतरे के संकेत

1. सांस लेने में दिक्कत, सांस बहुत तेज चलना या पसलियां अंदर धंसना

2. बच्चा बहुत सुस्त हो, दूध-पानी न पी रहा हो

3. बार-बार उल्टी या पेशाब बहुत कम आना

4. होंठ या चेहरा नीला पड़ना, बेहोशी या दौरा आना

5. बुखार के साथ हालत लगातार बिगड़ना

खासकर पाँच साल से छोटे बच्चे, अस्थमा, दिल या किडनी की बीमारी वाले और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों में इन्फ्लूएंजा गंभीर हो सकता है।

सबसे बड़ी गलती - बिना सलाह
एंटीबायोटिक देना

याद रखिए, इन्फ्लूएंजा वायरस से होता है और एंटीबायोटिक वायरस पर काम नहीं करता। जरूरत पड़ने पर कुछ गंभीर या उच्च जोखिम वाले बच्चों में डॉक्टर ही एंटीवायरल दवा देने का फैसला करते हैं। अपने मन से कोई दवा शुरू न करें।

बचाव के चार जरूरी नियम

1. बीमार बच्चे को स्कूल न भेजें – “कुछ नहीं होगा” सोचकर दूसरों को बीमार न करें

2. खांसते-छींकते समय मुंह-नाक रुमाल से ढकें और हाथ बार-बार धोएं

3. घर में हवा का आना-जाना रखें और भीड़ से बचें

4. सीजनल फ्लू का टीका – यह बचाव का सबसे अच्छा तरीका है। अपने डॉक्टर से टीके के बारे में जरूर पूछें

बीकानेर में पिछले बीस सालों से मैं बच्चों का इलाज कर रहा हूं। हर monsoon में ऐसे केस आते हैं। इसलिए अगली बार बच्चे को बुखार आए तो सबसे पहले H1N1 का नाम सुनकर घबराएं नहीं। बुखार देखें, बच्चे की सक्रियता देखें, सांस देखें, पानी पीना और पेशाब देखें। जरूरत लगे तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। हर वायरल बुखार H1N1 नहीं है, लेकिन H1N1को पहचानने के लिए सिर्फ बुखार देखना भी पर्याप्त नहीं है।” डर को दूर करें, जागरूकता अपनाएं। समय पर सही सलाह ही आपके बच्चे को सुरक्षित रखेगी। –डॉ. श्याम अग्रवाल, नवजात, शिशु एवं किशोर रोग विशेषज्ञ, बीकानेर, राजस्थान

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