क्रिकेट सट्टा : खुला चल रहा ‘खेल’, ‘टाइगर’ की सख्ताई भी इन पर बेअसर!

मुकेश पूनिया/बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज)। जुआरियों-सटोरियों के खिलाफ लगातार कार्यवाही की मुहिम मेें जुटी बीकानेर पुलिस पर क्रिकेट सट्टा जगत के बुकी भारी पड़ते दिख रहे है। हालांकि पिछले माह हुई जिला पुलिस की क्राइम मिटिंग में पुलिस अधीक्षक प्रदीप मोहन शर्मा ने आईपीएल सीजन में क्रिकेट सट्टेबाजी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिये तमाम थानेदारों को सख्त लहजे में हिदायत दी थी, लेकिन आईपीएल सीजन शुरू होने के साथ ही बीकानेर में परवान चढ़े क्रिकेट सट्टेबाजी दौर को देखते हुए पुलिस अधीक्षक की सख्ताई बेअसर साबित हो रही है।

सूत्रों के अनुसार शनिवार से शुरू हुए आईपीएल सीजन के अब तक हुए तीन मैचों में करोड़ों की सौदेबाजी हो चुकी है। इस का पुख्ता प्रमाण है कि शाम को आईपीएल का मैच शुरू होने के साथ ही बुकियों की लाईनों से जुड़े मोबाइलों में भावों के उतार-चढ़ाव और खाई-लगाई का आवाजें सुनाई देनी शुरू हो जाती है। जानकारी में रहे कि क्रिकेट सट्टेबाजी के मामले में बीकानेर एशिया की टॉप टेन शहरों में शामिल है और यहां नामी बुकियों के तार दुबई, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर से जुड़े हुए हैं।

बताया जाता है कि आईपीएल सीजन में श्रीगंगानगर, चूरू, हनुमानगढ़, नागौर तक की सौदेबाजी बीकानेर में हो रही है। जबकि बीकानेर के नामी बुकियों ने पुलिस कार्यवाही से बचने के लिये अपने ठिकाने दूसरे शहरो में बना रखे है और वहीं से छोटे सटोरियों के जरिये पंटरों को लाईने दे रखी है।

पुख्ता खबर है कि बीकानेर में गंगाशहर, भीनासर और नोखा तो क्रिकेट सट्टेबाजी के प्रमुख ठिकाने है। बीकानेर के क्रिकेट सट्टा कारोबार में जिले के कई नेता, व्यापारी गैंगवार से जुड़े बदमाश लिप्त है। शहर के कई नामी बुकियों के साथ कई बड़े नेता पार्टनर बने हुए है, पैसा भी बड़े व्यापारियों का लग रहा है। गैंगवार से जुड़े बदमाश भी इन्हीं के पैसों से बुक चला रहे हैं। पुलिस कार्यवाही से बचने के लिए बुकियों ने होटल और पॉश कॉलोनियों में किराये के मकानों में अपने नए ठिकाने बना लिए हैं।

यूं चलता है सौदेबाजी का सारा खेल

क्रिकेट सट्टेबाजी में सौदेबाजी का सारा खेल मैच शुरू होने के दस मिनट पहले ही शुरू हो जाता है। मैच शुरू होते ही सटोरिये अलर्ट हो जाते हैं। फिर सट्टा खेलने वाले फोन लगाना शुरू करते हैं, जिन्हें पंटर रिसीव करते हैं। मैच की पहली गेंद से लेकर जीत तक भावों में उतार-चढ़ाव चलता है। इनकी विशेष भाषा में एक लाख को एक पैसा, 50 हजार को अठन्नी, 25 हजार को चवन्नी कहा जाता है। यदि किसी ने दांव लगा दिया और वह कम करना चाहता है तो फोन पर पंटर को ‘मैंने चवन्नी खा ली’ कहना होता है।

आमतौर पर टीवी पर मैच देखने वालों को यह लगता है कि वहां मैदान में शॉट खिला कि टीवी पर आ गया, लेकिन ऐसा नहीं होता है। प्रसारण संबंधी तकनीकी कारणों से ग्राउंड और टीवी के शॉट में एक गेंद का अंतर आ जाता है और यही एक गेंद सटोरियों के लिए मुनाफे का जरिया बनती है। क्योंकि बुकियों के एजेंट सीधे ग्राउंड से हर गेंद की जानकारी तत्काल अपडेट करता है और यहां भाव बदल जाते हैं। दूसरा अपडेट सटोरिये इंटरनेट से भी लेते हैं। मार्केट में कुछ ऐसे ऐप हैं जो टीवी से पहले हर गेंद का अपडेट दे देते हैं। इन्हीं के माध्यम से भाव की दिशा तय हो जाती है।

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