बीकानेर : वैज्ञानिक तरीके से भेड़पालन करने की दरकार, आय में हो सकता है इजाफा…

बीकानेरabhayindia.comवेटरनरी विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय की ओर से बुधवार को ई-पशुपालक चौपाल आयोजित की गई।

इसमें प्रसार शिक्षा के निदेशक प्रो.राजेश कुमार धूडिय़ा एवं केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, मरूस्थलीय क्षेत्र बीकानेर के प्रभागाध्यक्ष एवं प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. एच.के. नरूला ने काश्तकरों को भेड़पालन से जुड़ी बारिकियों के बारे में बताया।

प्रो.आरके धूडिय़ा ने बताया कि एशिया की सबसे बड़ी ऊन मंडी बीकानेर में है जहां 250-300 ऊन धागे की फैक्ट्रियां है। राजस्थान की भेड़ों से अन्य राज्यों के मुकाबले तीन गुना अधिक ऊन का उत्पादन होता है। यहां भेड़ों की चोकला, मगरा और नाली नस्लों की ऊन विश्व के बेजोड़ गलीचे और नमदा बनाने के लिए श्रेष्ठ है। मालपुरा, जैसलमेरी और मारवाडी नस्लों की ऊन दरियां बनाने में उत्तम हैं।

ऊन उत्पादन में प्रथम…

देश में भेड़ों की संख्या 742.61 लाख है एवं इसकी 10.64 प्रतिशत भेड़ें यानि 79.04 लाख भेड़ें राजस्थान में पाई जाती है। देश में भेड़ संख्या के हिसाब से राजस्थान चौथे स्थान पर है जबकि राजस्थान ऊन उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। राजस्थान के पशुपाल भेड़ पालन परम्परागत तरीके से कर रहे है, जिसे वैज्ञानिक ढंग से करने की जरूरत है ताकि कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त हो सके।

केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, मरूस्थलीय क्षेत्र बीकानेर के प्रभागाध्यक्ष एवं प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. एच.के. नरूला ने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से भेड़ पालन करने से एक भेड़ से प्रतिवर्ष 4-5 हजार रूपए की आमदनी ली जा सकती है, मांस के लिए मालपुरा, जैसलमेरी, मारवाड़ी, नाली नस्लें उपयुक्त है। भेड़ पालन कम लागत में एक मुनाफे का व्यवसाय है। इसके लिए राष्ट्रीयकृत बैंको, नाबार्ड से कम ब्याज पर ऋण सुविधा मिलती है।

साल में दो बार प्रजनन…

डॉ.नरूला के अनुसार एक वयस्क भेड़ वर्ष में अमूमन दो बार प्रजनन करती है, इससे डेढ़ किलोग्राम ऊन प्राप्त की जा सकती है। ऊन कतरन की मशीनें उपलब्ध हैं। वैज्ञानिक भेड़ पालन के लिए उत्तम नस्ल का चयन और ग्याभिन एवं बच्चों को दो तीन माह तक संतुलित आहार दिया जाना चाहिए। भेड़ को साल भर में एक बार कृमिनाशक दवा पिलाएं।

समय पर उपचार…

डॉ. नरूला ने बताया कि समय पर टीकाकरण समुचित आहार तथा रोगों का समय पर उपचार करवाने से भेड़ों की मृत्युदर में कमी लाकर नुकसान से बचा जा सकता है। उन्होंने भेड़ पालकों को सलाह दी कि रेवड़ में नकारा पशुओं की छंटनी करके 30 वयस्क भेड़ों के लिए एक स्वस्थ मैंढा रखा जाना चाहिए।

पशुपालक चौपाल के संयोजक राजुवास के प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. राजेश कुमार धूडिय़ा ने बताया कि भेड़ पालन के इच्छुक व्यक्ति वैज्ञानिक भेड़ पालन के लिए केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर व बीकानेर एवं वेटरनरी विश्वविद्यालय के विभिन्न केन्द्रों से भी प्रशिक्षण ले सकते है। केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान की ओर से जरूरत के मुताबिक दो दिन से एक माह तक के प्रशिक्षण कार्यक्रम कराए जाते हैं।

दो भाइयों की कहानी पीयूष शंगारी की जुबानी...

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