Wednesday, May 27, 2026
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सिजोफ्रेनिया से डरें नहीं, डॉ. सिद्धार्थ असवाल ने बताया कैसे छुटकारा पा सकते हैं इस बीमारी से…

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बीकानेर Abhayindia.com विश्व सिजोफ्रेनिया दिवस के उपलक्ष में चिकित्सा प्रकोष्ठ भाजपा की ओर से वरदान हॉस्पिटल में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के जिला संयोजक डॉ. सिद्धार्थ असवाल ने बताया किसी जो सिजोफ्रेनिया एक मानसिक बीमारी है जो भावनात्मक बीमारी नहीं, बल्कि दीर्घ गंभीर और मस्तिष्क को असंतुलित कर बेकार करने वाली गंभीर बीमारी है। सिजोफ्रेनिया से पीड़ित रोगी ऐसी आवाज सुनने या ऐसी वस्तु देखने लगते हैं जो वास्तव में होती ही नहीं या यह रोगी ऐसा मानने लगते हैं कि कोई अन्य उनके दिमाग पर नियंत्रण कर रहा है। वे अपनी सोच से वास्तविकता को अलग करने में विफल रहते हैं। सिजोफ्रेनिया की बात करें तो यह पूरे संसार में पाया जाता है। सभी जातियों, समुदाय में सिजोफ्रेनिया की बीमारी पाई जाती है।

डॉ. असवाल ने बताया कि लगभग जनसंख्या का 1 प्रतिशत अपने जीवनकाल में से प्रभावित होने की संभावना रहती है।  इसका मुख्य कारण रासायनिक क्रियाएं एवं न्यूरोट्रांसमीटर का उथल-पुथल होना है। इसके साथ ही जीवन के उतार-चढ़ाव एवं तनाव अनुवांशिकता कुपोषण और वायरल संक्रमण भी सिजोफ्रेनिया के लिए जिम्मेदार है। सिजोफ्रेनिया का व्यक्ति अपने आप से बातें करता है। एकांत में चुपचाप बैठे रहता है। अपने आप हंसता है। रोने लग जाता है। दूसरों पर शक करता है। बाहर से कचरा एकत्रित कर अपनी जेब में डाल लेता है। कानों में आवाजें सुनाई देती है। बिना बात और फोन करता है। बैठे-बैठे हंसने लग जाता है। किसी वस्तु या व्यक्ति के होने का आभास होता है। उल्टी उल्टी बातें करता है। शरीर में असामान्य गतिविधियां करता है जो वास्तविकता से परे होती है। सिजोफ्रेनिया से ग्रसित रोगियों से अमानवीय व्यवहार जैसे मारना, पीटना, जंजीरों से बांधना आदि करना उचित नहीं होता। उन्हें मनोचिकित्सक को दिखाकर उचित इलाज करवाना चाहिए। मनोरोग या सिजोफ्रेनिया किसी प्रकार के जादू-टोने या  देवी-देवताओं का अभिशाप नहीं है। न ही यह जीवन के पिछले कर्मों का परिणाम है। यह छुआछूत का रोग भी नहीं  है। यह एक मानसिक रोग है जिसका इलाज भी है।

संगोष्ठी में डॉक्टर सिद्धार्थ असवाल  के साथ चांद राठौड़, प्रिया राजवी, डॉ. नरेंद्र स्वामी, Er इमरान उस्ता, नीतू आचार्य, माया सोनी, निशा पांडे अरविंद सिंह राठौड़, रीना पंवार, शीशराम खिलेरी, विकास बिश्नोई, सुग्रीव विश्नोई, रोहित भारती गोस्वामी, राजेंद्र गुप्ता, शैलेंद्र गुप्ता, विक्रम पुरोहित, भारती अरोड़ा, पंकज, भगवती स्वामी, आर्यन प्रताप भाटी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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