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RGHS अनियमितताओं पर कड़ा एक्शन जारी : 58 एलोपैथिक एवं 11 आयुर्वेदिक फार्मा स्टोर्स को किया योजना से बाहर, कइयों के लाइसेंस निरस्त

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जयपुर Abhayindia.com मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लगातार कठोर कदम उठा रही है। आरजीएचएस योजना में किसी भी प्रकार की वित्तीय एवं प्रक्रियागत अनियमितता के प्रति सरकार ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए 58 एलोपैथिक एवं 11 आयुर्वेदिक फार्मा स्टोरों को आरजीएचएस योजना की सूचीबद्ध लिस्ट से हटाया गया है। इनमें से 14 एलोपैथिक फार्मा स्टोरों के औषधि लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं तथा शेष 44 एलोपेथिक एवं 11 आयुर्वेदिक फार्मा स्टोर्स के औषधि लाईसेंस निरस्त करने के लिए अतिरिक्त औषधि नियंत्रक एवं संबंधित विभाग को पत्र लिखा गया है। साथ ही प्रचलित बाजार दरों से अत्यधिक अधिक मूल्य पर दवा बिलिंग करने वाले 10 अनुमोदित फार्मेसी स्टोरों का टीएमएस अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी ने इम्पेनल्ड फार्मेसीज के लिए आवश्यक निर्देश भी जारी किए हैं।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के अंतर्गत दवा निर्माता कंपनियों की पारदर्शिता, जवाबदेही एवं वित्तीय अनुशासन को और अधिक सुदृढ़ बनाने एवं पात्र लाभार्थियों को नियमानुसार गुणवत्तापूर्ण दवाईयां उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में अनियमितता पर कडा एक्शन आगे भी लिया जाएगा।

प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि जांच के दौरान ऐसे प्रकरण भी चिन्हित किए गए हैं, जिनमें कब्ज, कमजोरी जैसी सामान्य शिकायतों में भी चिकित्सकों द्वारा दस हजार से अधिक मूल्य की आयुष दवाइयां परामर्शित की गईं, जिससे राजकोष पर अनावश्यक वित्तीय भार पड़ा है। ऐसे कुछ मामलों में संबंधित चिकित्सकों एवं अनुमोदित फार्मेसियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए भुगतान की वसूली की कार्यवाही की जा रही है। अन्य संदिग्ध प्रकरणों की जांच जारी है। पूरे राज्य में गहन मानिटरिंग की जा रही है और सामान्य दर से अधिक दर पर दवा देने वाले फार्मेसियों के खिलाफ ऑडिट हो रही है, जिसमें निजी फार्मेसियों के साथ कॉनफैड भी शामिल है।

उन्होंने बताया कि उदाहरणस्वरूप Denosumab 60 mg Injection, जिसकी प्रचलित बाजार दर लगभग 6,500 रुपए है, का दावा 18,000  रुपए तक प्रस्तुत किए जाने जैसे मामले सामने आए हैं। जिन फार्मेसी स्टोरों के दावों में मूल्य निर्धारण अथवा खरीद संबंधी अनियमितता का संदेह पाया गया है, उनसे खरीद बिल एवं अन्य संबंधित अभिलेख सत्यापन हेतु मांगे गए हैं। जिन फार्मेसियों द्वारा लाभार्थियों को दवा नहीं दी जा रही है, उनको स्पष्टीकरण हेतु लिखा गया है तथा एक माह से अधिक समय तक दवा नहीं देने वाली फार्मेसियों के टीएमएस निलंबित करने की कार्यवाही की जा रही हैं। पूर्व में प्रस्तुत दावों का भी ऑडिट एवं सिस्टम आधारित सत्यापन किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, जेनेरिक दवाओं को ब्रांडेड दवाओं के नाम से विक्रय कर उनके आधार पर दावा प्रस्तुत करने वाले फार्मेसी स्टोरों के विरुद्ध भी नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि आरजीएचएस ने सभी अनुमोदित फार्मेसी स्टोरों से जारी निर्देशों का तत्काल प्रभाव से पूर्ण पालन सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि योजना के अंतर्गत दवा दावों में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं वित्तीय अनुशासन को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके तथा पात्र लाभार्थियों को नियमानुसार गुणवत्तापूर्ण एवं उचित मूल्य पर औषधियां उपलब्ध कराई जा सकें। आरजीएचएस द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि नियमों का पूर्ण पालन करने, पारदर्शी कार्यप्रणाली अपनाने एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पैनलबद्ध फार्मेसी स्टोरों को प्रोत्साहित करते हुए “ग्रीन फ्लैग” से चिह्नित किया जाएगा।

राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि पटेल ने बताया कि निर्देशों में दवा दावों में निर्माता द्वारा अनुमोदित सही पैक साइज, उत्पाद कोड एवं एमआरपी दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। गलत पैकेजिंग अथवा उत्पाद मैपिंग के आधार पर दावा प्रस्तुत करने पर अतिरिक्त भुगतान की वसूली की जाएगी तथा गंभीर अथवा बार-बार की गई अनियमितताओं पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

निधि पटेल ने बताया कि दवा दावों में किसी भी प्रकार की कृत्रिम मूल्य वृद्धि, असामान्य एमआरपी, गलत मूल्य निर्धारण अथवा अप्रमाणित दावे प्रस्तुत नहीं किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सभी दावे वास्तविक खरीद बिल, जीएसटी चालान, स्टॉक रजिस्टर एवं अन्य प्रामाणिक अभिलेखों के आधार पर प्रस्तुत किए जाएंगे तथा आरजीएचएस के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित अनिवार्य छूट का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

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