









जयपुर Abhayindia.com स्वायत्त शासन विभाग ने प्रदेश में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए लाइसेंस फीस का नया मॉडल लागू कर दिया है। केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत होटल और रेस्टोरेंट की श्रेणियों का पुनर्गठन करते हुए नई वार्षिक लाइसेंस फीस निर्धारित की गई है। इस संबंध में विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं। आपको बता दें कि पहले होटलों की स्टार रेटिंग और विभिन्न सुविधाओं के आधार पर कई श्रेणियां निर्धारित थीं, लेकिन अब उन्हें केवल पांच कैटेगरी में बांटा गया है। इसी प्रकार रेस्टोरेंट्स के लिए भी श्रेणियों की संख्या घटाकर तीन कर दी गई है। नई व्यवस्था में होटलों का वर्गीकरण कमरों की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर किया जाएगा।
नई दरों के अनुसार, 50 कमरों तक के होटल के लिए नगर निगम क्षेत्र में 25 हजार रुपये, नगर परिषद क्षेत्र में 20 हजार रुपये और नगर पालिका क्षेत्र में 15 हजार रुपये वार्षिक लाइसेंस फीस निर्धारित की गई है। वहीं, 51 से 100 कमरों वाले होटलों के लिए यह शुल्क क्रमशः 50 हजार, 40 हजार और 18 हजार रुपये तय किया गया है। स्विमिंग पूल, जिम, स्पा और अन्य लग्जरी सुविधाओं से युक्त 100 कमरों तक के होटलों के लिए नगर निगम क्षेत्र में 75 हजार रुपये, नगर परिषद क्षेत्र में 60 हजार रुपये और नगर पालिका क्षेत्र में 55 हजार रुपये फीस निर्धारित की गई है।
इसी तरह 150 कमरों तक वाले लग्जरी होटलों के लिए नगर निगम क्षेत्र में 1 लाख रुपये, नगर परिषद क्षेत्र में 80 हजार रुपये और नगर पालिका क्षेत्र में 70 हजार रुपये शुल्क तय किया गया है। 150 से अधिक कमरों वाले बड़े होटलों के लिए यह फीस क्रमशः 1.50 लाख रुपये, 1.25 लाख रुपये और 1 लाख रुपये होगी। रेस्टोरेंट्स के लिए भी नई दरें लागू की गई हैं। 100 सीट क्षमता वाले नॉन-एसी रेस्टोरेंट के लिए नगर निगम क्षेत्र में 7,500 रुपये, नगर परिषद क्षेत्र में 5 हजार रुपये और नगर पालिका क्षेत्र में 4 हजार रुपये फीस निर्धारित की गई है।
वहीं, 100 सीट क्षमता वाले एसी रेस्टोरेंट के लिए नगर निगम क्षेत्र में 20 हजार रुपये, नगर परिषद क्षेत्र में 15 हजार रुपये और नगर पालिका क्षेत्र में 12 हजार रुपये वार्षिक शुल्क तय किया गया है। 100 से अधिक सीटों वाले एसी रेस्टोरेंट के लिए यह फीस क्रमशः 30 हजार रुपये, 25 हजार रुपये और 20 हजार रुपये होगी। विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था से लाइसेंस प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी तथा होटल एवं रेस्टोरेंट व्यवसायों का वर्गीकरण एक समान मानकों के आधार पर किया जा सकेगा।


