Saturday, April 25, 2026
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…तो करेंगे पैन डाउन, मंत्रालयिक कर्मचारियों ने दी चेतावनी…

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बीकानेर abhayindia.com अखिल राजस्थान संयुक्त मंत्रालयिक कर्मचारी संघ ने मांगे नहीं मानने पर पैन डाउन हड़ताल की चेतावनी दी है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मनीष ने कहा कि मंत्रालयिक कर्मचारियों की मांगे एक चुनावी जुमला बनकर रह गई।

इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। पत्र के जरिए अवगत कराया है कि प्रदेश का मंत्रालयि क कर्मचारी शासन की रीड होता है क्योंकि सभी विभागों के प्रशासनिक दायित्व को भली-भांति त्याग, तपस्या और बलिदान का गुण अपनाकर अपना राज्य कार्य पूर्ण निष्ठा से संपादित करता है।

प्रदेश के मंत्रालयिक कर्मचारियों आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर होती जा रही है, क्योंकि वर्ष 2013 में वेतन कटौती का रूप लाभ को छीन लिया गया, एवं इसके बाद सातवें वेतन आयोग का लाभ मिलने पर भी प्रदेश का मंत्रालयिक कर्मचारी को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। संगठन स्तर पर दोबारा अवगत करवा रहे हैं कि इस प्रकार से प्रदेश के मंत्रालय कर्मचारियों के साथ सदैव ही आर्थिक भेदभाव किया है। मंत्रालयिक कर्मचारियों की मांगों पर तत्कालीन सरकार व मंत्रालयिक कर्मचारियों के मध्य एक समझौता हुआ जो कि आज तक लागू नहीं हुआ। अल्प वेतनभोगी कर्मचारियों की वेतन कटौती कर दी, ग्रेड पे 2400 के 3 लेवल और ग्रेड 28 00 दो लेवल कर दिए।

जायज है मांगे…

वर्तमान में भी इस कोविड-19 के काल में देश का अल्प वेतनभोगी मंत्रालयिक कर्मचारी लोकतांत्रिक ढंग से अपनी जायज मांगों के लिए प्रयास कर रहा है,हाल ही में प्रदेश के लगभग सभी जनप्रतिनिधियों ने मंत्रालयिक कर्मचारियों की मांगों पर आदेश किए जाने की अभीशंषा की है ।

वर्तमान में मंत्रालयिक कर्मचारियों की स्थिति यह है कि कोई भी विभाग्य जॉब चार्ट निर्धारित नहीं होने से मंत्रालय कर्मचारी ना तो तृतीय श्रेणी सेवाओं में आ रहा है, ना ही चतुर्थ श्रेणी एवं काम दोनों ही करता है। इसके अतिरिक्त भी प्रदेश के मंत्रालयिक कर्मचारियों अलग-अलग तरीके अपना कर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। यही नहीं राज्य सरकार ने सातवें वेतनमान में वेतन कटौती कर कर पे मैट्रिक्स लैब में उलझा कर इस अंतर को और भी गहरा कर दिया है, इस कारण सरकार की रीड की हड्डी समझे जाने वाला यह सब अपने आप को पिछड़ा मानने को मजबूर है।

प्रदेश के मंत्रालय के संगठनों के बार-बार सरकार को मांगों पर ज्ञापन भेजने के बाद भी सरकार मंत्रालयिक कर्मचारियों की मांगों को दरकिनार कर रही है जिससे प्रदेश के मंत्रालय कर्मचारियों में असंतोष हो गया है। इसके बाद भी सरकार ने यदि जायज मांगों को नहीं माना तो मजबूरन पैन डाउन करनी पड़ेगी।

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