Monday, June 22, 2026
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दहेज और मायरे में लिया एक रुपया-नारियल, समाज में पेश की आदर्श विवाह की मिसाल

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हेमेरां/सोहनलाल सारस्वत Abhayindia.com आज कल के भौतिकवादी व अर्थ प्रधान युग मे लड़की का रिश्ता पक्‍का होते ही बेटे पक्ष के ओर से दहेज में तरह-तरह के सामान की मांग शुरू हो जाती है। वहीं, बेटी वाले भी शादी में किसी सामान की कमी न रहे इसके लिए दिन-रात लग रहता हैं, लेकिन अब समय बदल रहा है। पढे-लिखे युवा इस दहेज वाली प्रथा का विरोध करते हुए दिखाई दे रहे हैं। कन्या को ही दहेज मानकर बिना दहेज की शादी कर युवा मिसाल पेश कर रहे हैं। एक युवा ने क्षेत्र में ऐसी ही मिसाल पेश की है।

समीपवर्ती एक छोटे से गांव आसेराँ के युवा मध्यप्रदेश के इंदौर में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर कार्यरत डॉक्टर मुन्नीराम गोदारा ने अपनी शादी में दहेज और मायरा ना लेकर गाँव और समाज के लिए मिसाल पेश की है। उनके इस फैसले पर समाज का शिक्षित वर्ग उनकी प्रशंसा करते हुए बधाई संदेश प्रेषित कर रहा है।

साधारण किसान परिवार के…

जब डॉक्टर से इस निर्णय के बारे में पूछा गया तो उसने कहा मेरा जन्म एक बहुत ही सामान्य परिवार में हुआ है। जीवन में हर प्रकार की परिस्थिति को खुद पर गुजरते हुए देखा है, इसलिए मैने यह सब ना लेने का विचार किया है। इसके पीछे मेरा एक उद्देश्य यह भी था आज कल जो नौजवान साथी सरकारी सेवा में बड़े पदों पर लग जाते हैं वो दहेज में बड़ी रकम की मांग करते हैं। इससे लड़की वाले परिवार पर बहुत बोझ आ जाता है। डॉक्टर गोदारा के किसान पिता रामलाल गोदारा अपने बेटे इस निर्णय पर गर्व महसूस करते हुए खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं।

वर डॉक्‍टर, तो वधु है नर्सिंग अधिकारी

मुनीराम गोदारा डॉक्टर है, वहीं गोदारा की पत्नी संजय कुमारी भी दिल्ली एम्स में नर्सिंग अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। झुंझुनू जिले की नवलगढ़ तहसील के गाँव चेलासी निवासी रामावतार दूत की लाड़ली सुपुत्री ने अपने पति के इस निर्णय पर खुशी जाहिर करते हुए समाज के लिए सराहनीय कदम बताया। क्षेत्र के विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों ने तारीफ़ करते हुए उज्जवल भविष्य की बधाई दी।

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