









जयपुर Abhayindia.com राज्य सरकार स्कूल शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के लक्ष्यों को केंद्र में रखते हुए व्यावसायिक शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इसके अंतर्गत आगामी शैक्षणिक सत्र 2026–27 से प्रदेश के 500 राजकीय विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा की शुरुआत की जाएगी, ताकि कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ कौशल आधारित प्रशिक्षण भी मिल सके।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें व्यवहारिक और रोजगारोन्मुखी हुनर से लैस करना है। चयनित विद्यालयों में आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रिटेल, हेल्थकेयर, एग्री-बिजनेस, टूरिज्म सहित अन्य आधुनिक एवं स्थानीय जरूरतों से जुड़े क्षेत्रों में कोर्स शुरू किए जाएंगे। राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा राजस्थान बजट 2026–27 में की है। वर्तमान में प्रदेश के 4019 विद्यालयों में पहले से व्यावसायिक शिक्षा संचालित की जा रही है।
इसके अतिरिक्त ‘स्कूल टू वर्क’ कार्यक्रम के तहत प्रत्येक जिले में एक विद्यालय को उन्नत व्यावसायिक उच्च माध्यमिक विद्यालय में क्रमोन्नत किया जाएगा। वहीं अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा के लिए अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास सहकारी निगम से लिए गए ऋण के समय पर भुगतान पर 2 प्रतिशत ब्याज में छूट भी दी जाएगी।
सुविधाओं एवं तकनीक आधारित शिक्षा पर फोकस
बजट में विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, तकनीक आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने और खेल सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।
कक्षा 8, 10 और 12 के मेधावी विद्यार्थियों को टैबलेट या लैपटॉप के लिए ई-वाउचर प्रदान किए जाएंगे, ताकि वे डिजिटल माध्यम से पढ़ाई को और प्रभावी बना सकें।
एक हजार राजकीय विद्यालयों में एआई आधारित पर्सनलाइज्ड लर्निंग लैब्स स्थापित होंगी ताकि डिजिटल माध्यम से पढ़ाई को और प्रभावी बना सकें।
विद्यालय तक बालिकाओं की पहुंच सहज बनाने के लिए कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाली जरूरतमंद छात्राओं को नि:शुल्क साइकिल के लिए ई-वाउचर दिए जाएंगे।
कक्षा 1 से 8 तक के 40 लाख से अधिक विद्यार्थियों को निःशुल्क यूनिफॉर्म के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी।
आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए खेल सामग्री और ‘जादुई पिटारा’ उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि शुरुआती कक्षाओं में सीखने को रोचक बनाया जा सके।
घूमंतु, अद्र्ध घूमंतू समुदाय यथा गाड़िया लोहार, बंजारा इत्यादि सहित ड्रॉप-आउट और वंचित बच्चों को फिर से शिक्षा से जोड़ने के लिए ‘राज पहल कार्यक्रम’ के तहत प्रत्येक जिले में ‘स्कूल ऑन व्हील्स’ की व्यवस्था की जाएगी। शैक्षिक संभागों पर 6 माह के स्कूल रिडिनेस कैंप आयोजित किए जाएंगे। टॉयलेट से वंचित सभी विद्यालयों में टॉयलेट का निर्माण कराया जाएगा।
जर्जर विद्यालयों की मरम्मत एवं भवन विहिन विद्यालयों में भवन निर्माण कार्य किए जाएंगे। इसके तहत 2500 से अधिक विद्यालयों की मरम्मत और 300 से अधिक नवीन विद्यालय भवनों का निर्माण होगा।
1500 से अधिक विद्यालयों में आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं, स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब बनाया जाएगा।
छात्राओं को बेहतर आवासीय वातावरण मुहैया कराने के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और छात्रावासों में आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
विज्ञान एवं गणित जैसे विषयों में रूचि बढ़ाने एवं अंतरिक्ष उपलब्ध्यिों से परिचय कराने के लिए जोधपुर और जयपुर में स्पेस गैलेरी का निर्माण किया जाएगा।
शहीद सैनिकों के कक्षा 11 एवं 12 में पढ़ने वाली प्रतिभावान पुत्रियों को देय छात्रवृति क्रमश: 180 व 100 रुपए प्रतिमाह को बढ़ाकर 2500 रुपए वार्षिक किया गया है।
प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगिता हेतु वर्तमान में खेल देय राशि 50 हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपए किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में ओपन जिम और खेल मैदान विकसित किए जाएंगे, ताकि युवाओं को स्थानीय स्तर पर खेल सुविधाएं मिल सकें।


