









जोधपुर Abhayindia.com राजस्थान उच्च न्यायालय की एकलपीठ के न्यायाधीश विनित कुमार माथुर ने वन विभाग में वरिष्ठ लिपिक से सहायक प्रशासनिक अधिकारी व सहायक प्रशासनिक अधिकारी से अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के पद पर गैर अनुसूचित क्षेत्र में होने वाली पदोन्नति को उच्च न्यायालय में प्रस्तुत रिट याचिकाओं में होने वाले निर्णय के अध्याधीन रखने का अन्तरिम आदेश पारित किया है।
उदयपुर के वन विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत भैरूसिंह कुम्पावत व श्रीराम गुर्जर तथा सहायक प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत अनुराग अरोड़ा, हितेश सक्सेना व गणेश लाल कीर ने राजस्थान उच्च न्यायालय के समक्ष अपने अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा के माध्यम से गैर अनुसूचित क्षेत्र व अनुसूचित क्षेत्र में सहायक प्रशासनिक अधिकारी व अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के पद पर होने वाली पदोन्नति के संबंध में रिट याचिकाएं प्रस्तुत की।
वन विभाग द्वारा दिनांक 13.06.2024 को वरिष्ठ सहायक से सहायक प्रशासनिक अधिकारी व सहायक प्रशासनिक अधिकारी से अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के पद पर पदोन्नति के लिए अनुसूचित क्षेत्र व गैर अनुसूचित क्षेत्र की पदोन्नति के लिए अन्तरिम वरिष्ठता सूची जारी की गई। इस अन्तरिम वरिष्ठता सूची में यह स्पष्ट उल्लेख था कि जिस भी कार्मिक को कोई एतराज हो तो वो 15 दिवस के मध्य अपना एतराज प्रस्तुत कर सकता है।
सभी याचिकाकर्ता द्वारा अनुसूचित क्षेत्र की इस वरिष्ठता सूची के संदर्भ में एतराज प्रस्तुत करते हुए निवेदन किया कि उनके द्वारा वर्ष 2014 में ही विकल्प पत्र गैर अनुसूचित क्षेत्र के लिये प्रस्तुत किया जा चुका है एवं इस वरिष्ठता सूची के तहत भी दोबारा एतराज प्रस्तुत किया गया है। अतः इनका नाम गैर अनुसूचित क्षेत्र की वरिष्ठता सूची में रखा जाय ना कि अनुसूचित क्षेत्र की वरिष्ठता सूची में।
वन विभाग के समक्ष एतराज प्रस्तुत करने के बावजूद भी प्रधान मुख्य वन संरक्षक जयपुर द्वारा 16.07.2024 को अन्तिम वरिष्ठता सूची जारी की गयी व उसमें उनका नाम अनुसूचित क्षेत्र वाली वरिष्ठता सूची में ही रखा गया। विभाग के इस कृत्य से व्यथित होकर याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय की शरण ली। उच्च न्यायालय की एकलपीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता का यह तर्क था कि याचिकाकर्ताओं द्वारा अनुसूचित क्षेत्र के संदर्भ में जो नियम बने थे उन नियमों में नियम 6(3) के तहत पूर्व में ही गैर अनुसूचित क्षेत्र के लिए वर्ष 2014 में विकल्प पत्र भरकर दिया जा चुका है व विभाग द्वारा जब अंतरिम वरिष्ठता सूची जारी की गयी उसमें भी याचिकाकर्ताओं द्वारा अपना एतराज प्रस्तुत किया जा चुका है व सक्षम अधिकारी द्वारा वरिष्ठता सूची में संशोधन के लिए उनका एतराज उच्च अधिकारियों को उचित माध्यम से व निर्धारित समय में भेजा जा चुका है उसके बावजूद भी याचिकाकर्ताओं का नाम गैर अनुसूचित क्षेत्र की वरिष्ठता सूची में नहीं जोड़ना विधि विरूद्ध है।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए उच्च न्यायालय ने उनके द्वारा प्रस्तुत रिट याचिकाओं में वन विभाग को नेाटिस जारी कर जबाब तलब करते हुए वन विभाग द्वारा सहायक प्रशासनिक अधिकारी व अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के पद पर गैर अनुसूचित क्षेत्र में होने वाली पदोन्नति को उच्च न्यायालय के निर्णय के अधीन रखने का आदेश पारित किया।






