जयपुर Abhayindia.com प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने कहा कि गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग के लिए चलाए गए 5 दिवसीय अभियान के दौरान यह तथ्य ध्यान में आया कि हाई रिस्क प्रेगनेंसी के लक्षणों में अधिकतर एनीमिया से संबंधित है। उन्होंने निर्देश दिए कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं में एनीमिया प्रबंधन के लिए मिशन मोड में काम किया जाए, ताकि सीवर एनीमिया को माइल्ड एनीमिया में बदला जा सके।
राठौड़ ने बुधवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षकों, प्रमुख चिकित्सा अधिकारियों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने मेडिकल कॉलेज एवं जिलावार संबंधित अधिकारियों से गत् 24 घंटे में हुए सामान्य तथा सिजेरियन प्रसवों की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने फील्ड में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के चिन्हिकरण में कम प्रगति वाले करौली, फलौदी, कोटपूतली-बहरोड, जोधपुर-प्रथम, बालोतरा, खैरथल-तिजारा, अलवर, बाड़मेर, भरतपुर एवं डीग जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में गुरूवार को आयोजित किए जाने वाले मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस के सत्रों की सघन मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। इस दौरान प्रत्येक स्तर से फील्ड में मॉनिटरिंग कर गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं से फीडबैक भी लिया जाए। प्रमुख शासन सचिव ने प्रदेशभर में आवश्यक ब्लड की आपूर्ति के लिए समय-समय पर रक्तदान शिविर के आयोजन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि रेफरल के लिए काम में आने वाले 104 एवं 108 एम्बुलेंस पर कार्य ड्राइवर एवं अन्य स्टॉफ के मोबाइल नम्बर संबंधित एएनएम, सीएचओ से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों के पास अपडेट रहने चाहिए। साथ ही उन्होंने किसी भी कारण से खराब पड़ी गाड़ियों को तत्काल रिपेयर कराने के निर्देश दिए हैं।
निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने कहा कि सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि उनके अधीनस्थ कार्यरत सभी एएनएम के पास आवश्यक उपकरण जैसे बीपी जांच मशीन, गर्भस्थ शिशु की धड़कने जांचने वाले उपकरण सहित आवश्यक किट्स उपलब्ध होने चाहिए। बैठक में मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा बाबूलाल गोयल, अतिरिक्त मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. टी. शुभमंगला, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।













