








बीकानेर Abhayindia.com ढढ्ढा चौक क्षेत्र की ढढ्ढा कोटड़ी में गच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिनमणि प्रभ सूरीश्वर महाराज के आज्ञानुवर्ती बीकानेर मूल की साध्वी श्री दीपमाला व साध्वीश्री शंखनिधि म.सा. के सान्निध्य शुक्रवार को निखिल नाहटा पुत्र प्रफुल्ल नाहटा के अट्ठाई तपस्या करने पर अभिनंदन किया गया। जिन दत्त सूरी व सिद्धि तप के तपस्वियों की तपस्या की अनुमोदना की गई।
सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट व श्री अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद की बीकानेर इकाई के संयुक्त तत्वावधान में सकलश्री संघ के सहयोग से आयोजित चातुर्मास में शनिवार को ढ्ढढा चौक क्षेत्र की क्षमा कल्याण वाटिका (ढढ्ढा कोटड़ी) में दोपहर दो बजे से चार बजे तक 16 सतियों (जैन धर्म की महान साध्वीवृंद) की सचेतन झांकी व प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
श्री अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद की बीकानेर इकाई के अध्यक्ष अनिल सुराणा ने बताया कि 16 सतियों की गौरव गाथा के साथ प्रेरणादायक प्रस्तुति होगी। इसमें उनकी जीवनगाथा, तप, त्याग को दर्शाया जाएगा। इस प्रस्तुति के लाभार्थी श्रीमती अंशुमाला, सुश्रावक कंवर लाल खजांची परिवार है। तपस्वी निखिल नाहटा का अभिनंदन चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के अध्यक्ष हरीश नाहटा, श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के मंत्री रतन लाल नाहटा, श्री अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद के राष्ट्रीय संरक्षक राजीव खजांची, बीकानेर इकाई के उपाध्यक्ष कमल सेठिया आदि ने किया। तपस्वी ने गुरुवंदना की तथा गाजे बाजे के साथ जिनालयों में दर्शन-वंदन किया।
गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. ने प्रवचन में कहा कि शरीर व आत्मा दोनों अलग है। पंच महाभूतों से बना सभी जीवों का शरीर एक दिन आयुष्य पूर्ण कर निश्चत रूप् से समाप्त होता है। मृत्यु ही शाश्वत सत्य है। शरीर में रहने वाली आत्मा अमर तथा शरीर से अलग है। आत्मा, शुद्ध, बुद्ध व निर्मल है। शरीर व आत्मा अलग होने की समझ परमात्मवाणी, विवेक व आत्म ज्ञान से मिलती है। आत्मा को जिनवाणी के माध्यम से परमात्मा से जोड़ने का पुरुषार्थ व प्रयास करें।


