





बीकानेर abhayindia.com पाकिस्तानी खुफिया ऐजेंसी आईएसआई के लिये बीकानेर रैंज में आर्मी मूवमेंट की जासूसी के आरोप में पकड़े गये चिमनलाल नायक और विकास जाट के नेटवर्क को खंगालने में जुटी खुफियां एजेंसियां उन लोगों का पता लगाने में जुटी हैं, जिन्होंने इनका लिंक आईएसआई से जोड़ा था। फिलहाल दोनों आरोपी खुफिया पुलिस की रिमांड पर है। तमाम खुफिया एजेंसियां उनसे चरणबद्ध तरीके से पूछताछ कर जासूसी के नेटवर्क से जुड़ी कडिय़ा जोड़ रही है।
सबसे पहले यह पता करने जुटी है कि यह दोनों आरोपी आईएसआई के एजेंटों के सम्पर्क में कैसे आए। दूसरा इनका सूचना भेजने का तरीका कैसे था और आईएसआई के लोगों को किसी तरह की सूचना के लिए इन्हें जासूस नियुक्त किया था। सूचना लेने और पैसों का भुगतान करने तक के मामले में कितने लोगों की सहभागिता है। इसके साथ ही यह भी पता किया जा रहा है इसमें कितने प्रदेशों के लोग जुड़े हुए हैं।
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अब तक की जांच पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि भारतीय सेना की जासूसी के लिये पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। आईएसआई ने देश के कई राज्यों में अपना नेटवर्क फैला लिया है। खुफिया जानकारी प्राप्त करने से लेकर भेजने तक तथा जानकारियों के बदले किए जाने वाले भुगतान की जानकारी आईएसआई से जुड़े जासूसों को भी नहीं होती। ऐसे में जासूसी के आरोपी के गिरफ्त में आने के बाद भी सुरक्षा एजेंसियां आगे की कडिय़ां नहीं जोड़ पाती।
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सेना से जुड़ी सामरिक महत्व की जानकारी आईएसआई को भेजने के मामले में बीकानेर और झुझंनू से पकड़े गये जासूसी के आरोपी विकास जाट और चिमनलाल से हुई जांच में इस तरह के खुलासे हुए हैं। यह भी पता चला है कि जासूसी के लिये दोनों आरोपियों को दूसरे प्रदेशों से रूपये भेजे गये है। राजस्थान से एक भी पैसा ट्रांसफर नहीं किया। पैसा दूसरे प्रदेशों से एटीएम के माध्यम से खाते में भेजा गया है।
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इंटेलिजेंस से जुड़े अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि यह आईएसआई से जुड़े लोग बड़ी योजनाबद्ध तरीके से बात करते हैं। इसके लिए महिलाओं की एक टीम भी काम कर रही है। सूचना के लिए भी अलग-अलग कलस्टर बना रखे हैं। इस मामले में गिरफ्तार चिमनलाल का कनेक्शन महज विकास तक है। चिमनलाल विकास तक अपनी जानकारी भेजता था। इसे आगे फारवर्ड करने का काम विकास का था। इसी तरह पैसा भेजने वाले को यह पता नहीं होता कि वह किस सूचना का पैसा भेज रहा है।
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