Hometrendingअभय जैन ग्रंथालय में निहित (ऐतिहासिक अमर कृति अमृतसार)

अभय जैन ग्रंथालय में निहित (ऐतिहासिक अमर कृति अमृतसार)

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बीकानेर Abhayindia.com संवत 1685 फाल्गुन सुदी बुधवार को उदयपुर में इस अमर कृति की रचना हुई। उदयपुर के महाराणाओं संबंधित कई ऐतिहासिक ग्रंथ प्राप्त हैं उनमें से मेवाड़ के इतिहास का वर्णन करने वाला अति महत्वपूर्ण काव्य जो पंडित जीवंनधर जी द्वारा लिखा गया। अमृतसार भी तीन प्रतियों सहित बीकानेर के अभय जैन ग्रंथालय में उपलब्ध है। इस ग्रंथ में चित्तौड़गढ़ के महाराणाओ का भी उल्लेख है। उदयपुर बसाने वाले उदय सिंह और उनके पुत्र महाराणा अमर सिंह और उनके सेनापति झाला हरिदास का उल्लेख किया है।

यह काव्य महाराणा अमर सिंह के मंत्री डूंगर सिंह ने बनवाया है जिसका उल्लेख तीसरे अधिकार की समाप्ति में मिलता है।इस काव्य में तीन खंड हैं। प्रथम खंड में अमर सिंह का प्रताप वर्णन, मंत्री डूंगर सिंह का वर्णन, उनके परोपकारी कार्य, इसके बाद काशी दास पुरोहित, धन्वंतरी-वैद्य सिंधु चंद्र आदि का वर्णन है। इसका दूसरा खंड नीति खंड है, जिसमें शास्त्र अभ्यास आदि का वर्णन है। तीसरा धर्म अधिकार खंड है। इस काव्य से विदित होता है कि नागौर- मारवाड़ निवासी वनिक लटू का पुत्र शंकर के तीन पुत्रों में डूंगर सिंह मंत्री थे। इस प्रकार इस ऐतिहासिक ग्रंथ में मेवाड़ के इतिहास की संपूर्ण जानकारी मिलती है जो शोधार्थियों व ऐतिहासिक जिज्ञासुओं को नवीन दिशा प्रदान करेगी। -अंजना शर्मा (ज्योतिष दर्शनाचार्य) (शंकरपुरस्कारभाजिता) पुरातत्वविद्, अभिलेख व लिपि विशेषज्ञ प्रबन्धक देवस्थान विभाग, जयपुर राजस्थान सरकार

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