Saturday, June 6, 2026
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कॉम्प्लीमेंट्री फीडिंग डे (6 जून) : आज का अन्न, कल का भविष्य

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बीकानेर Abhayindia.com ‘इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स’ आज (6 जून) देश भर में ‘कॉम्प्लीमेंट्री फीडिंग डे’ मना रही है। इस वर्ष की थीम है “कॉम्प्लीमेंट्री फीडिंग: फ्यूलिंग ग्रोथ, ब्रेन डेवलपमेंट एंड द फ्यूचर”। एक बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में 24 साल के अनुभव के बाद में दावे से कह सकता हूं कि बच्चे की जिंदगी के पहले 1000 दिन, और खासकर 6 महीने से 2 साल तक का समय, उसका पूरा भविष्य तय कर देता है।

कॉम्प्लीमेंट्री फीडिंग क्या है?

सीधे शब्दों में कहें तो 6 महीने की उम्र के बाद, सिर्फ मां के दूध से बच्चे का पेट नहीं भरता। बढ़ते शरीर को ज्यादा ऊर्जा, प्रोटीन, आयरन और विटामिन चाहिए। इसीलिए स्तनपान जारी रखते हुए, उम्र के हिसाब से सुरक्षित, पौष्टिक ठोस आहार शुरू करना ही ‘कॉम्प्लीमेंट्री फीडिंग’ है। यह ‘Weaning’ नहीं है। मां का दूध 2 साल तक या उससे आगे भी चलता रहे, साथ में ऊपरी आहार जुड़ता जाए।

यह इतनी जरूरी क्यों है?

मेरे क्लिनिक में हर हफ्ते 2-3 बच्चे एनीमिया और कुपोषण के साथ आते हैं। कारण एक ही : 6 महीने के बाद या तो सिर्फ पतला दलिया-चावल का पानी दिया गया, या फिर डिब्बाबंद खाना शुरू कर दिया। याद रखिए :-

1. विकास का आधार : 6 महीने से 2 साल के बीच बच्चे की लंबाई का 40% और दिमाग का 80% विकास होता है। इस समय सही पोषण नहीं मिला तो यह कमी जिंदगी भर पूरी नहीं होती।

2. दिमाग का ईंधन : आयरन, जिंक, ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्व याददाश्त और सीखने की क्षमता बनाते हैं। आज दी गई एक कटोरी खिचड़ी, कल स्कूल में बच्चे के नंबर बन सकती है।

3. बीमारी से कवच : समय पर और सही ऊपरी आहार शुरू करने से निमोनिया, डायरिया जैसी बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है।

4. भविष्य की सेहत : बचपन में दिया गया संतुलित आहार बड़े होकर मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोगों का खतरा कम करता है।

IAP के 7 सुनहरे नियम — 
हर माता-पिता याद रखें

1. सही समय : 6 महीने पूरे होने पर शुरू करें। न पहले, न ज्यादा देर से।

2. जारी रखें स्तनपान : 2 साल तक या उससे आगे भी मां का दूध देते रहें।

3. विविधता है जरूरी : केवल दलिया नहीं। खाने में सभी 7 फूड ग्रुप शामिल करें — अनाज, दाल, दूध-दही, हरी सब्जी, पीले-नारंगी फल, तेल-घी, और अंडा/मांसाहार अगर लेते हैं तो।

4. गाढ़ा खिलाएं, पतला नहीं : बच्चे का पेट छोटा होता है। पतली खिचड़ी से पेट तो भरेगा, पोषण नहीं। चम्मच से गिरे नहीं, इतना गाढ़ा भोजन दें।

5. बार-बार खिलाएं : 6-8 महीने : दिन में 2-3 बार। 9-11 महीने: 3-4 बार। 12-24 महीने : 3 बार खाना + 2 बार पौष्टिक नाश्ता।

6. रेस्पॉन्सिव फीडिंग : टीवी-मोबाइल बंद करके प्यार से खिलाएं। बच्चा मुंह फेरे तो जबरदस्ती न करें। धैर्य रखें।

7. सफाई का ध्यान : खाना बनाने और खिलाने से पहले हाथ धोएं। बर्तन साफ रखें।

इस ‘कॉम्प्लीमेंट्री फीडिंग डे’ पर बीकानेर के हर घर से मेरा आग्रह है : अपने बच्चे को आज अच्छा पोषण दीजिए, कल वो देश को स्वस्थ बनाएगा। भ्रम छोड़ें, डिब्बाबंद फूड से बचें, और अपने परिवार के डॉक्टर से सलाह लेकर घर का बना ताजा खाना शुरू करें। -डॉ. श्याम अग्रवाल, MD Pediatrics, 24 वर्षों से बीकानेर में सेवारत वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ हैं

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