Monday, June 22, 2026
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अध्‍यापिका के स्थायीकरण आदेश प्रतिहारित करने पर रोक, प्राथमिक शिक्षा विभाग का मामला

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जोधपुर Abhayindia.com राजस्थान उच्च न्यायालय की एकल पीठ के न्यायाधीश अरूण मोंगा ने राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय तनाड़ियों की ढाणी, (भीलों की ढाणी), धोरीमन्ना, बाड़मेर में अध्यापक ग्रेड तृतीय लेवल द्वितीय (अंग्रेजी) के पद पर कार्यरत मोनिका के स्थायीकरण आदेश के प्रतिहारित करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई है।

राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय तनाड़ियों की ढाणी, (भीलों की ढाणी) धोरीमन्ना, बाड़मेर में अध्यापक ग्रेड तृतीय लेवल द्वितीय (अंग्रेजी) के पद पर कार्यरत मोनिका नामक अध्यापिका की नियुक्ति दिनांक 05.03.2019 को नियमित वेतन श्रृंखला पर हुई थी। याचिकाकर्त्ता द्वारा दो वर्ष का परीविक्षा काल पूर्ण करने पर जिला शिक्षा अधिकारी, प्राथमिक शिक्षा, बाड़मेर द्वारा आदेश दिनांक 22.09.2021 से उसकी सेवाओं का स्थायीकरण कर दिया गया। स्थायीकरण करने के बाद उसके द्वारा स्थायीकरण के लिये विभाग के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किये गये एवं निवेदन किया गया कि उसकी सेवाओं का स्थायीकरण तो कर दिया गया मगर स्थायीकरण का वित्तीय लाभ इसे प्रदान नहीं किया गया है अतः वहां लाभ उसे प्रदान किया जावें।

विभाग द्वारा जब अनेकों बार निवेदन करने के बाद भी स्थायीकरण का वित्तीय लाभ प्रदान नहीं किया गया तब उसने राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण के समक्ष एक अपील प्रस्तुत की। उक्त अपील में प्राथमिक शिक्षा विभाग को वर्ष 2023 के नोटिस जारी किये गये। विभाग द्वारा उस अपील में आज दिनांक तक जबाब प्रस्तुत नहीं किया गया तथा उक्त अपील आज भी लम्बित है। उक्त अपील के लम्बित रहते हुए ही दिनांक 05.04.2024 के आदेश से द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी, प्राथमिक शिक्षा, बाड़मेर ने याचिकाकर्त्ता का जो स्थायीकरण वर्ष 2021 में किया गया था उसे यह कहते हुए प्रतिहारित (विड्रो) कर लिया कि प्रार्थी ने नियुक्ति से संबंधित जो दस्तावेज पेश किये गये है उन दस्तावेजों की जांच जिला स्तर पर चल रही है अतः उसका स्थायीकरण आदेश प्रतिहारित किया जाता है।

विभाग के आदेश दिनांक 05.04.2024 से व्यथित होकर प्रार्थीनी ने अपने अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा के माध्यम से एक रिट याचिका उच्च न्यायालय जोधपुर के समक्ष प्रस्तुत की। उच्च न्यायालय के समक्ष प्रार्थीनी के अधिवक्ता का तर्क था कि उसके स्थायीकरण आदेश को प्रतिहारित करने से पूर्व उसे किसी प्रकार का कोई नोटिस या सुनवाई का अवसर प्रदान नहीं किया गया। विवादित आदेश में विभाग द्वारा यह भी अंकित किया गया कि उसकी नियुक्ति के समय के प्रस्तुत दस्तावेज की जिला स्तर पर जांच चल रही है परन्तु उस जांच के संदर्भ में भी प्रार्थीनी को कोई सूचना आज दिनांक तक नहीं दी गयी। प्रार्थीनी के अधिवक्ता का उच्च न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क था कि प्रार्थीनी के स्थायीकरण करने से पूर्व सभी जांच करने के बाद ही उसका स्थायीकरण का आदेश वर्ष 2021 में जारी किया गया और अब अचानक दस्तावेज जांच करने की आड़ में उसका स्थायीकरण आदेश प्रतिहारित करना विधि विरूद्ध है। प्रार्थी के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय ने प्रारम्भिक स्तर पर स्थायीकरण आदेश प्रतिहारित करने के आदेश को अनुचित मानते हुए प्राथमिक शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जबाब तलब किया व स्थायीकरण प्रतिहारित करने के आदेश दिनांक 05. 04.2024 पर अंतरिम रोक लगाई।

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