Friday, May 15, 2026
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चातुर्मास में अधिकाधिक धर्म ध्यान करें : प्रवर्तिनी शशि प्रभाजी म.सा.

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बीकानेर abhayindia.com जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के गच्छाधिपति आचार्यश्री मणि प्रभ सूरिश्वर की आज्ञानुवर्ती, साध्वी सज्जनश्रीजी म.सा की शिष्या वरिष्ठ साध्वी, प्रवर्तिनी शशि प्रभा म.सा के सान्निध्य में सोमवार से चातुर्मासिक चतुर्दशी से चातुर्मास जप, तप व प्रवचन, देव पूजा, प्रतिक्रमण व सामयिक  के कार्यक्रम बागड़ी मोहल्ले की ढढ्ढा कोटड़ी में  शुरू हुए। मंगलवार नियमित प्रवचन का समय सुबह नौ बजे से सवा दस बजे तक और सामूहिक प्रतिक्रमण का समय शाम छह बजे निर्धारित किया है। साध्वीश्री के सान्निध्य में ज्ञान वाटिका सहित विविध कार्यक्रम चातुर्मास के दौरान होंगे।

शशि प्रभा म.सा
शशि प्रभा म.सा

साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा. ने प्रवचन में कहा कि हमें हर क्षण विवेक व उपयोग से पाप कर्मों से बचना है तथा जैना से यत्न पूर्वक कार्य करना है। विवेक व उपयोग ही धर्म है। अधिकाधिक समय परमात्म साधना, आराधना व भक्ति में लगाना है। परमात्मा भक्ति सहज है। साधक में आत्मा से परमात्मा जुड़न की शक्ति है। श्रावक-श्राविकाओं को अपनी  शक्ति का सदुपयोग विवेक से करना है। हिंसा, रात्रि भोजन से बचना है तथा द्रव्य व भाव पूजा, जप, तप व स्वाध्याय, ध्यान, प्रतिक्रमण व सामयिक के माध्यम से अपने कर्मबंधनों से मुक्ति के लिए प्रयास व पुरुषार्थ करना है। आलस व प्रमाद को त्यागना है।

पूर्व में साध्वी सौम्यगुणा ने भजन ’’ लाग्यो-लाग्यो चैमासो, अब नई प्रेरणा लेनी है, संता री वाणी करसी चानणो’ सुनाते हुए कहा कि परमात्मा का स्मरण करने से रोग, शोक दोष दूर होते है। परमात्मा के पास अक्षत खजाना है, उस खजाने की प्राप्ति के लिए जागृत होने व श्रद्धा भीतर में जगाने की दरकार है। चातुर्मास देव, गुरु व धर्म के प्रति हमें जगाने, जागृति लाने तथा अपने आत्म कल्याण का मार्ग दिखाने के लिए है। चातुर्मास का सदुपयोग करें।

साध्वीश्री शशि प्रभाजी के सान्निध्य में मंगलवार को नाल दादाबाड़ी में दोपहर को भक्ति संगीत के साथ पूजा होगी। पूजा में बीकानेर के अनेक श्रावक-श्राविकाएं शामिल होंगे।

प्रवर्तिनी साध्वीश्री शशि प्रभा का जुलूस के साथ चातुर्मासिक प्रवेश, वंदन-अभिनंदन से गूंजी गलियां…

 

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