Thursday, June 4, 2026
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कविता छंद के बिना संभव नहीं : मालचंद तिवाड़ी

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श्रीडूंगरगढ़ Abhayindia.com राजस्थान में इक्कीसवीं सदी की हिन्दी कविता पर केन्द्रित राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर और राष्ट्र भाषा हिन्दी प्रचार समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय समारोह रविवार को बाद दोपहर कविता की प्रतिस्थापना के अनेक प्रश्नों के साथ सम्पन्न हुआ। आयोजन के समाहार सत्र की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि-कथाकार मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि कविता छंद के बिना संभव ही नहीं है। छंद मुक्त होते हुए भी उसमें छंद का छायाभास रहता है। छंद की स्मृति के बिना कोई कवि कविता करता ही नहीं। लेखक नश्वरता के भय से शब्दों की शरण लेता है।

उन्होंने इस अवसर पर इस आवश्यकता को जताते हुए कहा कि इस दो दिवसीय कविता विमर्श में किसी प्रौढ सक्रिय कवि को भी साथ होना चाहिए था। इस सत्र के विशिष्ट अतिथि वयोवृद्ध साहित्यकार नटवरलाल जोशी ने कहा कि कविता अमृत की भांति होती है, जिसे यह सुधा प्राप्त होती है, वह सौभाग्यशाली होता है। मुख्य अतिथि कवि राजेश चड्ढा ने कहा कि हम राजस्थान के सशक्त दौर की हिन्दी कविता के साक्षी रहे हैं। विगत दो दशकों को ठहराव का समय कहा जा सकता है। समाहर सत्र का संचालन कवि शंकरसिंह राजपुरोहित ने किया।

इससे पूर्व प्रातःकालीन सत्र की अध्यक्षता करते हुए समालोचक डाॅ चेतन स्वामी ने कहा कि कविता का सीधा सम्बन्ध मन से है, वह उसकी अभिव्यक्ति है। कवि का जैसा मन वैसी उसकी कविता। जीवन के बहुत छोटे छोटे नतीजों से उपजनेवाली कविता उतनी पकावट नहीं ले पाती, इस कारण वह दीर्घगामी नहीं बन सकती। कविता शीघ्रता से रच देने की कोई विधा नहीं है और न ही क्षणांश में पढकर समझ लेने की। परिपक्व होकर प्रस्तुत होगी तो कालजयी होगी, वरना पढ़ने की चीजों का तो वर्तमान में ऑवरफ्लो हो रहा है।

दूसरे दिन प्रथम सत्र में दो पत्रों का वाचन हुआ। कवि कथाकार मदनगोपाल लड्ढा ने हिन्दी कविता का युवा परिदृश्य विषय पर पत्रवाचन करते हुए कहा कि राजस्थान के युवा कवियों की कविता किसी भी मायने में वृहतर हिन्दी काव्याकाश में कमतर आंकने जैसी नहीं है। बल्कि विश्व कविता से कदमताल कर रही है। कवयित्री मोनिका गौड़ ने इक्कीसवीं सदी की मुखर होती स्त्री विषय पर पत्रवाचन किया। उन्होंने कहा कि नई कविता स्त्री की नव पहचान को प्रस्तुत कर रही है। अब स्त्री घुटघुटकर जीने को बाध्य नहीं है। उसके अरमान और सपने उसकी अपनी मुट्ठी में है।

मुख्य अतिथि नवनीत पाण्डे ने कहा कि राजस्थान की कविता के अंकन के औजार दूसरों से उधार नहीं लेने हैं। कार्यक्रम का संचालन हिन्दी कवयित्री डाॅ संजू श्रीमाली ने किया और आभार ज्ञापन समारोह संयोजक रवि पुरोहित ने किया।

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