जयपुर Abhayindia.com प्रदेश में विद्युत तंत्र की मेंटेनेन्स कर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में विद्युत वितरण निगमों को सेवाएं दे रहे एफआरटी कार्मिकों तथा उनके परिवारों को विद्युत दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा का संबल प्रदान करने की ऊर्जा विभाग ने पहल की है। ऐसे 5 हजार एफआरटी कार्मिकों को भारतीय स्टेट बैंक से अधिकतम 30 लाख रूपए का दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध होगा। शारीरिक निशक्तता की स्थिति में बैंक से वे 15 लाख रूपए तक का दुर्घटना बीमा क्लेम पा सकेंगे।
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर की उपस्थिति में गुरूवार को विद्युत भवन में एफआरटी सेवा प्रदाता कम्पनी तथा भारतीय स्टेट बैंक के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। नागर ने इस अवसर पर राज्य के आधिकारिक ड्रिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग टूल की भी लॉन्चिंग की। कार्यक्रम में ऊर्जा सचिव आरती डोगरा, ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध निदेशक शिव प्रसाद नकाते, उत्पादन निगम के सीएमडी देवेन्द्र श्रृंगी सहित विद्युत निगमों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
नागर ने इस अवसर पर कहा कि उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में एफआरटी कार्मिक हमारे महत्वपूर्ण भागीदार हैं। विद्युत तंत्र के रख-रखाव के दौरान कई बार लापरवाही अथवा भूलवश विद्युत दुर्घटनाएं हो जाती हैं। इनमें दुर्भाग्य से एफआरटी कार्मिकों की असामयिक मृत्यु तक हो जाती है। ऐसे में उनके परिवार तथा हम सभी गहरी पीड़ा से गुजरते हैं। उन्हें संबल प्रदान करने के लिए एफआरटी सेवा प्रदाता कम्पनी तथा भारतीय स्टेट बैंक ने एमओयू कर एक नेक शुरूआत की है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि विकेन्द्रित अक्षय ऊर्जा प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग टूल की लाॅिन्चंग से एकीकृत डिजीटल प्रणाली का उपयोग करते हुए अक्षय ऊर्जा को आधुनिक ऊर्जा प्रबंधन से जोड़ा जा सकेगा। ऊर्जा सचिव आरती डोगरा ने बताया कि पूर्व में विद्युत निगमों में कार्यरत कार्मिकों को भी एसबीआई के सहयोग से निशुल्क दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध कराया जा चुका है। जिससे कार्मिकों को व्यापक लाभ मिल रहा है। अब तक 82 कार्मिकों के आश्रितों को सामूहिक सावधि बीमा योजना में 8 करोड़ 20 लाख़ रूपए तथा 8 कार्मिकों के आश्रितों को व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना में 6 करोड़ 60 लाख़ रूपए बीमा राशि प्रदान की गई है। स्थाई निशक्तता होने पर जयपुर डिस्कॉम के एक कार्मिक को 50 लाख़ रूपए की मुआवजा राशि प्रदान की गई है। एफआरटी कार्मिकों के लिए हुए इस एमओयू से उन्हें भी आर्थिक संबल मिल सकेगा।
डोगरा ने बताया कि ड्रिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग टूल से 150 यूनिट प्रति माह निशुल्क बिजली योजना में आवेदन व सब्सिडी वितरण, पीएम कुसुम, पीएम सूर्यघर, सरकारी कार्यालयों में रूफटाप सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने जैसी योजनाओं की बेहतर मॉनिटरिंग संभव होगी। सोलर पार्कों, विभिन्न अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं, पीएम सूर्यघर, पीएम कुसुम आदि योजनाओं से प्राप्त नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता का आकलन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। डिस्कॉम्स द्वारा 150 यूनिट प्रति माह निशुल्क बिजली योजना में दी जा रही 17 हजार रूपए की राज्य सब्सिडी का वितरण, पीएम सूर्यघर योजना में वेन्डर्स तथा पीएम कुसुम योजना के अन्तर्गत सौर ऊर्जा उत्पादकों का रजिस्ट्रेशन आदि कार्य भी इस मॉनिटरिंग टूल के जरिए किए जाऐंगे।
ऊर्जा सचिव ने बताया कि अक्षय ऊर्जा की सभी योजनाओं एवं परियोजनाओं में आवेदन, स्वीकृति, अनुदान, वेन्डर पंजीकरण और उत्पादन निगरानी से जुड़ी प्रक्रियाओं को अब एकीकृत प्लेटफार्म से संचालित किया जाएगा। यह पोर्टल उपभोक्ता, वेन्डर, वितरण निगमों तथा अक्षय ऊर्जा निगम के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करेगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का प्रयास है कि राजस्थान देश के स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में और अधिक योगदान देने में समर्थ हो सके। इसके लिए यह पोर्टल उपयोगी सिद्ध होगा।














