Sunday, June 21, 2026
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नुमाइश मैदान में 22 जून को होगी आरक्षण हुंकार रैली, जाट समाज करेगा शक्ति प्रदर्शन, बेनीवाल ने भरी हुंकार

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जयपुर Abhayindia.com प्रदेश के भरतपुर, धौलपुर और डीग जिलों के जाट समुदाय को केंद्र सरकार की नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण का लाभ दिलवाने की मांग जाट आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से 22 जून को भरतपुर के नुमाइश मैदान में ‘आरक्षण हुंकार रैली’ का आयोजन किया जा रहा है। इस रैली को लेकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नेता और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया पर संदेश साझा किया है। उन्होंने समाज के लोगों से इस कार्यक्रम में रिकॉर्ड संख्या में जुटने की अपील की है ताकि सरकार तक समाज की सामूहिक आवाज को प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।

सांसद बेनीवाल ने अपनी पोस्ट में लिखा, “प्रिय साथियों, धौलपुर, भरतपुर व डीग जिले के जाट समाज को केंद्र में ओबीसी आरक्षण का लाभ दिलवाने से जुड़े मुद्दों और समाज के हितों की रक्षा के लिए कल दिनांक 22 जून 2026 को भरतपुर में जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा आयोजित आरक्षण हुंकार रैली में आप सभी की गरिमाइम उपस्थिति आवश्यक है। यह केवल एक सभा नहीं, बल्कि हमारे अधिकारों, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए एकजुट होकर अपनी बात रखने का अवसर है। आइए, अधिक से अधिक संख्या में कल भरतपुर पहुँचकर समाज की ताकत और एकता का परिचय दें। आपकी भागीदारी ही जाट आरक्षण संघर्ष समिति को मजबूती प्रदान करेगी। मुझे भी आरक्षण संघर्ष समिति ने आमंत्रित किया है, मैं कल समर्थकों के साथ भरतपुर जाऊंगा। ‘एकता हमारी शक्ति है, अधिकार हमारा संकल्प है।'”

जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, भरतपुर के प्रसिद्ध ‘नुमाइश मैदान’ में इस महारैली की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 22 जून 2026, सोमवार सुबह 11:15 बजे से रैली की कार्यवाही और वक्ताओं के संबोधन आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएंगे। नुमाइश मैदान में हजारों लोगों के बैठने के लिए वाटरप्रूफ टेंट और मंच का निर्माण किया गया है। भीषण गर्मी को देखते हुए संघर्ष समिति द्वारा पूरे मैदान में ठंडे पानी और प्राथमिक चिकित्सा की व्यापक व्यवस्था की गई है।

आपको बता दें कि प्रदेश में जाट समाज को राज्य स्तर पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत आरक्षण का लाभ काफी समय से मिल रहा है, लेकिन भरतपुर और धौलपुर (और हाल ही में गठित डीग) जिलों के जाटों के साथ केंद्र सरकार के स्तर पर एक अलग तकनीकी और ऐतिहासिक पेंच फंसा हुआ है।’

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