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आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष समारोह : तेले का तप तथा सवा करोड़ भिक्खू स्याम् का होगा जप

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बीकानेर Abhayindia.com भीनासर के तेरापंथ सभा भवन में मंगलवार को आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष कार्यक्रम का आगाज हुआ। युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वीश्री जिनबालाजी के सान्निध्य में आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष कार्यक्रम का शुभारम्भ पानमल डागा आदि के मंगलाचरण से हुआ। इस दौरान भिक्षु म्हारे प्रगट्याजी गीत का आंशिक संगान व जप का प्रयोग भी किया।

साध्वीश्री जिनबालाजी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि आचार्य भिक्षु जन्म से ही सिद्ध योगी थे। उनकी योग साधना अद्वितीय थी। आचार निष्ठा व आगम निष्ठा भी अटूट थी। साध्वीश्री करुणाप्रभाजी ने भिक्खू स्याम् -इस नवाक्षरी मंत्र के महत्व को उजागर करते हुए श्रद्धा के साथ मंत्र जपने की प्रेरणा दी।

तेरापंथ युवक परिषद की युवा टीम ने शब्द व चित्र तथा महिलामण्डल की महिलाओं ने सामूहिक गीत का संगान किया। इस दौरान तेरापंथ फिल्म शूटिंग के माध्यम से तेरापंथ के इतिहास से जुड़े अनेक घटना, प्रसंगों को उजागर करते हुए एक लघुनाटिका का मंचन किया गया। इसी के साथ ही भिक्षु चेतना वर्ष के शुभारंभ अवसर पर त्रिदिवसीय तेले का तप तथा सवा करोड़ भिक्खू स्याम् जप का अनुष्ठान भी प्रारंभ किया गया। जिसमें सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम का संचालन साध्वी भव्यप्रभाजी ने किया।

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