Friday, June 19, 2026
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वास्तुसम्मत है उत्तरमुखी मकान तो खोल सकता है उन्नति के द्वार

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वास्तुशास्त्र में दिशाओं का महत्व बहुत अधिक माना जाता है क्योंकि सही या गलत दिशाओं में रखी वस्तु हो या फिर भवन का निर्माण सभी का प्रभाव मनुष्य के जीवन पर पड़ता है इसलिए जब भी कोई व्यक्ति अपने नये भवन का निर्माण करवाता है या फिर खरीदता है तो वह हमेशा यह देखता है कि घर का मुख किस ओर है।

शास्त्रों के अनुसार, उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना जाता है। इसके साथ ही इस दिशा में कई देवी-देवताओं का वास माना गया है तथा उत्तरमुखी घर बहुत शुभ माने जाते हैं, इन्हें भाग्यशाली और समृद्धि लाने वाला माना जाता है। इसके साथ ही इस घर में सकारात्मकता का संचार करने वाला माना जाता हैं। वास्तु ग्रन्थों में कहा गया है-“उत्तरमुखी गृहे पुण्यं, धनधान्यसमृद्धिदम्। आरोग्यं च सुखं चैव, गृहस्थस्य न संशयः।।” इसका आशय है उत्तर मुखी घर पुण्य, धन, धान्य, समृद्धि, आरोग्य और सुख देने वाला होता है। गृहस्थ के लिए यह घर शुभ होता है।

घर उत्तर मुखी है यह अच्छी बात है लेकिन केवल इससे ही शुभ परिणाम नहीं आते हैं। ध्यान रहे कि घर उत्तर मुखी भले ही हो उसका निर्माण वास्तु अनुकूल होगा तभी वह लाभदायक सिद्ध होगा अन्यथा नहीं होगा।

वास्तुशास्त्र के अनुसार, उत्तरमुखी भवन का निर्माण करवाते समय इस बात का ध्यान रखें की भवन में दक्षिण दिशा की जो चारदीवारी है या दक्षिण दिशा की ओर जो निर्माण कार्य है वह अन्य दिशाओं के मुकाबले ऊंचा होना चाहिए।

वास्तु के अनुसार, उत्तर मुखी मुख्य द्वार वाले घर में मास्टर बेडरूम के लिए, दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र उचित स्थान है। पश्चिम, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम जैसी दिशाएं उत्तर मुखी घर में बेडरूम रखने के लिए आदर्श हैं। घर के दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पूर्व की ओर बेडरूम डिजाइन करने से बचें क्योंकि इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं या परिवार में विवाद हो सकते हैं।

सुनिश्चित करें कि सोते समय आपका सिर उत्तर दिशा की ओर न हो वैज्ञानिक रूप से व वास्तु के लिहाज से ये गलत है इससे नींद सहित अन्य कई शारीरिक समस्या हो सकती है और नकारात्मक ऊर्जा पैदा हो सकती है। वास्तु के अनुसार सोने की सबसे अच्छी दिशा दक्षिण की ओर सिर करके होती है। अब तक पचासों घरों की वास्तु विजिट के दौरान जो निष्कर्ष निकाला वो आपके अवलोकनार्थ प्रस्तुत है।

केस स्टडी 1- मैंने रामचन्द्र के घर का वास्तु अवलोकन किया उसका घर उत्तरमुखी था। उसके घर का प्रवेश उत्तर-पश्चिम से था। उसके घर में सबसे घर में सबसे अधिक यानि भारी निर्माण दक्षिण-पूर्व में हो रखा था तथा उसके बाद उत्तर-पश्चिम में निर्माण हो रखा था। इस घर का दक्षिण-पश्चिम हिस्सा बिल्कुल ख़ाली था। इन दोषों का प्रभाव यह हुआ कि यहाँ लगातार तीन पीढ़ी तक स्त्रियाँ शांति से नहीं रह सकी उनका आपस में तथा पुरुषों के साथ भी विवाद ही चलता रहा तथा उनको धन की हानि भी खूब हुई। ऐसा भी देखा गया कि व्यापार में लगाया गया पैसा भी डूब गया।

रसोई दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम दिशा में होनी चाहिए। रसोई के लिए दक्षिण दिशा का चुनाव भी कर सकते हैं। यह भी महत्वपूर्ण है कि उत्तरमुखी घर वास्तु योजना के अनुसार उत्तर-पूर्व कोने में रसोई न हो। इसी तरह, उत्तर या दक्षिण-पश्चिम दिशा में रसोई बनाने से बचें। घर में संघर्ष को रोकने के लिए रसोई को इन दिशाओं में रखने से बचें। उत्तर-पूर्व दिशा में रसोईघर बनाने से भी बचना चाहिए क्योंकि यह किसी के कैरियर के विकास को प्रभावित कर सकता है। रसोईघर घर के मुख्य द्वार की ओर नहीं होना चाहिए।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, अध्ययन कक्ष को घर या फ्लैट के पूर्व, उत्तर-पूर्व दिशा में बनाना शुभ माना जाता है, क्योंकि ये ज्ञान की दिशाएं हैं। उत्तर मुखी घर या फ्लैट में अध्ययन कक्ष कभी भी दक्षिण-पूर्व या दक्षिण-पश्चिम कोने में नहीं होना चाहिए। पढ़ाई के समय विद्यार्थी का चेहरा उत्तर-पूर्व, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। स्टडी रूम का मेन गेट पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर होना आदर्श है, जबकि उत्तर दिशा दूसरा सबसे अच्छा ऑप्शन है।

पूजा कक्ष और ध्यान कक्ष को उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। पूजा कक्ष के लिए पूर्व और पश्चिम दिशाएं भी उपयुक्त मानी जाती हैं। पूजा करते समय आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए।

केस स्टडी 2- मैंने वास्तु विजिट के दौरान विनोद के घर का अवलोकन किया जो कि उत्तरमुखी था उनके घर में अतिथि कक्ष तो उचित स्थान पर बनाया हुआ था परंतु इसके साथ ही घर में प्रवेश करते ही शौचालय उत्तर-पूर्व में था जो कि बिल्कुल भी वास्तुसम्मत नहीं है। इससे उनके घर में अशांति बहुत ज़्यादा रहती है उनके घर के बच्चों को भी कैरियर में बहुत संघर्ष करना पड़ रहा है। एक छोटी सी गलती ने उनको इतनी परेशानी में डाल दिया।

ध्यान रखें कि उत्तर-पूर्व कोने में शौचालय, बेडरूम या रसोई न हो। सीढ़ियों के नीचे, बाथरूम के पास या बेडरूम में मंदिर बनाने से बचना चाहिए। स्विमिंग पूल या जल भंडारण टैंक को उत्तर, उत्तर-पूर्व, पूर्व या पश्चिम दिशाओं में रखा जा सकता है।

उत्तर मुखी घर में वास्तु दोष आने की वजह कई हो सकती हैं. जैसे, मुख्य द्वार की गलत स्थिति, रसोई का गलत स्थान, बाथरूम और शौचालय की गलत स्थिति, और घर में गंदे पानी की निकासी की गलत स्थिति। उत्तर मुखी घर में वास्तु दोष होने पर घर के लोग ज़्यादातर समय घर से बाहर रहते हैं। घर में चोरी की आशंका बढ़ जाती है। घर में रहने वाली महिलाएं ज़्यादा चंचल रहती हैं और घर में कम टिकती है। घर में रहने वाले पुरुषों को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उत्तर मुखी घर में वास्तु दोष को दूर करने के लिए योग्य वास्तुविद का मार्गदर्शन लेकर समय रहते सुधार लेनी चाहिए। -सुमित व्यास, एम.ए (हिंदू स्टडीज़), काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी, मोबाइल – 6376188431

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