Monday, June 22, 2026
Hometrendingवीरांगना पुण्य श्लोक महारानी अहिल्याबाई होलकर के जीवन वृत्त ने किया रोमांचित

वीरांगना पुण्य श्लोक महारानी अहिल्याबाई होलकर के जीवन वृत्त ने किया रोमांचित

AdAdAdAdAdAdAdAdAdAd

बीकानेर Abhayindia.com इंदौर-मालवा प्रदेश की महारानी अहिल्याबाई होलकर के 300वें जन्म जयंती वर्ष में उनके जीवन वृत्त को जानने, समझने और विविध क्षेत्रों में उनके अवदानों का पुण्यस्मरण कर उनकी स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने और विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में उनकी जीवन गाथा से ऊर्जा प्राप्त करने के दृष्टिकोण से अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के द्वारा महारानी अहिल्याबाई के जीवन वृत्त से विद्यार्थियों को परिचित करवाने के लिए विभिन्न महाविद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित करवाए जा रहे हैं। इसी श्रृंखला में सामुदायिक विज्ञान महाविधालय बीकानेर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में विषय प्रवेश करते हुए वक्ता दिग्विजय, प्रदेश संगठन मंत्री ने महारानी के जीवन वृत्त से विद्यार्थियों को उनके जीवन के प्रेरक प्रसंगों को उद्धृत कर परिचित करवाया। मुख्य वक्ता प्रोफेसर शशिकांत ने अहिल्याबाई के बाल्यकाल से लेकर यशस्वी महारानी के रूप में विविध क्षेत्रों में उनके कर्तृत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। महारानी अहिल्याबाई असाधारण प्रतिभा संपन्न वीरांगना, न्याय प्रिय, धर्म परायण, कूटनीतिज्ञ, प्रजा के लिए वात्सल्य की प्रतिमूर्ति, पर्यावरण प्रेमी एवं कठोर प्रशासक जैसे अद्वितीय गुणों को अपने में समाए हुए थीं।

उन्होंने अपने जीवन काल में बद्रीनाथ से रामेश्वरम तथा सोमनाथ से पुरी तक अनेकानेक मंदिरों का जीर्णोद्धार, धर्मशालाओं, तालाबों आदि का निर्माण करवाया। महिला शिक्षा, कामगारों, बुनकरों के लिए हस्तशिल्प के विशेष प्रबंध किए। उन्होंने भारत की सनातन संस्कृति के सामासिक स्वरूप को पहचान कर सभी वर्गों के उत्थान के लिए निष्पक्ष प्रयास किए।

अधिष्ठात्ता डॉ विमला डुकवाल ने अपने संबोधन में पीड़ा प्रकट की कि आज का विद्यार्थी महारानी के नाम से भी परिचित नहीं है। आज भारतीय इतिहास अध्ययन में उन सब जीवन चरित्रों को सम्मिलित किए जाने की आवश्यकता है जिनके जीवन से विद्यार्थियों को प्रेरणा और बल मिले। उन्होंने कहा कि बालक अनुकरणशील होता है। उसके सामने यदि श्रेष्ठ चरित्र होगा तो वह उसका अनुसरण करेगा और उसी के अनुरूप स्वयं को ढालने का प्रयास करेगा। आज औपनिवेशिक मानसिकता से युवाओं को मुक्त करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में सामुदायिक विज्ञान महाविधालय की अधिष्ठाता, सभी शेक्षणिक स्टाफ एवम सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ मंजू राठौड ने किया।

AdAdAdAdAdAdAdAdAdAdAdAdAdAd
- Advertisment -

Most Popular

error: Content is protected !!