Monday, June 22, 2026
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शीतलामाता की पूजा-अर्चना और व्रत से मिलेगी सभी रोगों से मुक्ति…

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‘बसौड़ा’ के नाम से लोकप्रिय शीतला अष्‍टमी (Sheetala Ashtami) इस बार 16 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन शीतला माता को बासी खाने का भोग लगाया जाता है। मान्‍यता के अनुसार, इस व्रत में पूरे विधि-विधान के साथ मां की पूजा-अर्चना की जाती है। इस की तैयारियां एक दिन पहले से ही शुरू हो जाती हैं। इस दिन घर में खाना बनाने या किसी अन्य काम के लिए चूल्हा भी नहीं जलाया जाता है।

इस बार शीतला अष्टमी के दिन पूजा करने का शुभ समय सुबह 6:46 बजे से लेकर शाम 06:48 बजे तक है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, शीतलामाता की पूजा-अर्चना और व्रत करने से सभी तरह के रोगों से मुक्ति मिलती है। मान्‍यता यह भी है कि व्रत करने से चेचक जैसे संक्रामक रोग में भी शीतला माता अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।

गधे की सवारी करने वाली शीतला माता के एक हाथ में कलश पकड़ा हुआ है और दूसरे हाथ में झाडू है। माना जाता है कि इस कलश में लगभग 33 करोड़ देवी-देवता वास करते हैं। शीतलाष्टमी के अगले दिन इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि भक्त खुद बासी खाने का सेवन न करें। ऐसा करने से वो बीमार पड़ सकते हैं।

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