Friday, May 15, 2026
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सुष्मिता देव ने कांग्रेस छोड़ी, चिदंबरम और सिब्‍बल ने कसा तंज…

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नई दिल्‍ली Abhayindia.com कांग्रेस पार्टी को एक और बड़ा झटका लग गया है। महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुष्मिता देव ने पार्टी छोड़ दी है। असम के सिलचर से पूर्व सांसद सुष्मिता देव ने सोनिया गांधी को इस्तीफा सौंपा है। उन्होंने अपना ट्विटर बायो भी बदलकर कांग्रेस की ‘पूर्व सदस्य’ कर दिया है। उनके पार्टी से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस पार्टी के अंदर ही सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस सांसद रिपुन बोरा ने सुष्मिता देव से अपने फैसले पर फिर विचार करने की गुजारिश की है। इधर, सुष्मिता के पार्टी छोड़ने के बाद कार्तिक चिंदबरम और कपिल सिब्बल ने अपनी राय रखते हुए युवा नेताओं के इस तरह से कांग्रेस छोड़कर जाने पर सवाल खड़े किए है। दोनों ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी आंखें बंद कर आगे बढ़ रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम ने सुष्मिता देव के इस्तीफे पर लिखा कि हमें इस बात पर गहन विचार करने की जरूरत है कि सुष्मिता देव जैसे लोग पार्टी छोड़कर क्यों जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सुष्मिता देव अब जल्द ही ममता बनर्जी की टीएमसी पार्टी में शामिल हो सकती है। सुष्मिता देव असम-बंगाल के बड़े नेता संतोष मोहन देव की बेटी हैं।

राजस्‍थान में तबादलों पर प्रतिबंध में छूट, अब 15 सितम्‍बर तक हो सकेंगे तबादले

जयपुर Abhayindia.com राजस्‍थान की गहलोत सरकार ने स्वाधीनता दिवस पर अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर प्रतिबंध में छूट को एक माह आगे बढा दिया है। इस बारे में आज जारी आदेश के अनुसार प्रदेश में अब कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले 15 सितंबर तक किए जा सकेंगे। आपको बता दें कि इससे पहले तबादलों में छूट की अवधि 14 अगस्त तक ही थी। प्रदेश में छह जिलों में पंचायत चुनाव हो रहे है उनमें तबादले नहीं हो सकेंगे। आवश्यक होने पर राज्य चुनाव आयोग की अनुमति लेनी होगी।

आजादी की 75वीं वर्षगांठ : पीएम मोदी ने कहा- तुम उठो तिरंगा लहरा दो, भारत के भाग्य को फहरा दो…

नई दिल्‍ली Abhayindia.com प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी में भारत के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने से कोई भी बाधा रोक नहीं सकती। आज की युवा पीढ़ी देश को बदलने का ताकत रखती है। पीएम मोदी ने आज लगातार आठवीं बार लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा फहराया। उन्‍होंने अपने भाषण में एक कविता के जरिए मौजूदा दौर को बेहतर बताते हुए कहा- ‘कुछ ऐसा नहीं जो कर ना सको, कुछ ऐसा नहीं जो पा ना सको, तुम उठ जाओ, तुम जुट जाओ, सामर्थ्य को अपने पहचानो, कर्तव्य को अपने सब जानो, भारत का ये अनमोल समय है, यही समय है, सही समय है।’ उन्‍होंने आगे कहा- यही समय है, सही समय है, भारत का अनमोल समय है। असंख्य भुजाओं की शक्ति है, हर तरफ़ देश की भक्ति है, तुम उठो तिरंगा लहरा दो, भारत के भाग्य को फहरा दो।

पीएम मोदी ने कहा- 21वीं सदी में भारत के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने से कोई भी बाधा रोक नहीं सकती। हमारी ताकत हमारी जीवटता है, हमारी ताकत हमारी एकजुटता है। हमारी प्राणशक्ति, राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम की भावना है। मेरा विश्वास देश के युवाओं पर है। मेरा विश्वास देश की बहनों-बेटियों, देश के किसानों, देश के प्रोफेशनल्स पर है। ये वो पीढ़ी है जो हर लक्ष्य हासिल कर सकती है।

अपने भाषण में किसानों ज़िक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि छोटे किसान उनकी प्राथमिकता हैं। देश के 80 प्रतिशत से ज्यादा किसान ऐसे हैं, जिनके पास 2 हेक्टेयर से भी कम जमीन है। पहले जो देश में नीतियां बनीं, उनमें इन छोटे किसानों पर जितना ध्यान केंद्रित करना था, वो रह गया। अब इन्हीं छोटे किसानों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में हमें देश के छोटे किसानों की सामूहिक शक्ति को और बढ़ाना होगा। उन्हें नई सुविधाएं देनी होंगी।

आचार्य ज्योति मित्र का व्‍यंग्‍य- साहित्य का सिकंदर! 

उस्तादजी बचपन से ही सिकंदर को अपना आदर्श मानते रहे हैं। मानें भी क्यों ना? वो सिकंदर ही तो था जिसका पाठ उन्हें कंठस्थ याद था। वो पाठ उनकी स्मृति में हमेशा के लिए छप गया था कि सिकंदर महान था, वो विश्व विजय के लिए निकला था। बस वो दिन और आज का दिन, उस्तादजी भी महान बनने के लिए हाथ-पैर मारने लगे। वे उस समय से महान बनने के लिए लालायित थे जब वे पूरी तरह से मानव भी नहीं बने थे। गणित में तो वे आर्यभट्ट के चेले हैं इसलिए कैलकुलेशन कर उन्होंने पहले लोगों को महान घोषित करने का काम बड़ी शिद्दत से किया। सच तो यह है कि वे जब, जिसे और जहाँ चाहें, महान घोषित कर सकते हैं।

ये तो उस्तादजी का ही कमाल था कि उन्होंने ऐसे कई महान बना दिए जो ठीक से इंसान भी नहीं थे। उस्तादजी के प्रसाद से वे सीधे भगवान हो गए! उस्तादजी के महान बनाने के हुनर ने हमें भी अंदर तक झकझोर दिया। आप ऐसे समझ लें कि महान बनने की हमारी दबी इच्छा भी हिलोरे मारने लगी। अपनी इच्छा को अमलीजामा पहनाने के लिए हम भी उस्ताद जी के अखाड़े में पहुँच गए। वहां जाकर तो उस्ताद जी की महानता से आतंकित हो गए। उनकी महानता का तेज इतना था जिसे हम बर्दाश्त नहीं कर पाए। आपसे क्या छिपाना, अपनी कमजोर इम्युनिटी के कारण हम उस्ताद जी के सामने एक मिनट भी नहीं ठहर पाए। भारत के इतिहास में नौ रत्न रखने वाला एक अकबर ही महान नहीं हुआ। हमारे उस्ताद जी ने भी अपने नौ रत्न अपॉइंट कर रखे हैं। ये बात अलग है कि हमने भी एक बार उनका दसवां रत्न बनने का सांगोपांग प्रयास किया, लेकिन नौ रत्नों के विद्रोह के डर से हमारे सारी कोशिशें भोथरी हो गई। उनके अपने पर्सनल हिस्टोरियन हैं जो साहित्य की सूनी गोद भरने का श्रेय उस्ताद जी को ही देते हैं।

शुरुआत में साहित्य बहुत ही आशाभरी निगाहों से उस्ताद जी की ओर निहार रहा था, लेकिन उस्ताद जी का रोल मॉडल तो सिकंदर रहा है। कहते हैं अपनी मृत्यु तक सिकन्दर उस तमाम भूमि को जीत चुका था, जिसकी जानकारी उसके देश के लोगों को थी। हमारे उस्ताद जी भी कम नहीं है, उन्होंने साहित्य की सभी विधाओं में अपना जौहर दिखाते हुए अपने दौर के सभी सम्मान व पुरस्कारों पर बलपूर्वक अपना आधिपत्य जमा लिया। उस्ताद जी के साहित्य के इस अश्वमेध घोड़े को जिसने भी पोरस बनकर रोकने की कोशिश की, उस पर उनका प्रकोप टूट पड़ा।

हमारे उस्ताद जी साहित्यिक चौकीदारी को कर्म-कांड मानते रहे हैं। साहित्य का यह प्रधान सेवक यह काम दरबारी इतिहासकारों के भरोसे नहीं छोड़ सकता, इसलिए अपनी ‘साहित्यिक चौकीदारी’ की वसीयत वे जरूर अच्छे से किसी गुरू अरस्तू के नाम लिखेंगे। -ज्‍योति मित्र आचार्य, उस्ता बारी के अंदर, बीकानेर

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