ग्रेड पे को लेकर कर्मचारी एकजुट, आंदोलन की रणनीति में जुटे, देखें वीडियो…

बीकानेरAbhayindia.com शिक्षा विभाग में कार्यरत कनिष्ट सहायक(लिपिक ग्रेड द्वितीय) की ग्रेड पे नहीं बढ़ाए जाने से कर्मचारियों में रोष है। लगातार संघर्ष के बावजूद शासन में सुनवाई नहीं होने से खफा कर्मचारी अब आंदोलन की रणनीति बनाने की तैयारी में जुट गए हैं।

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शिक्षा विभगीय कर्मचारी संघ के संस्थापक मदनमोहन व्यास अभय इंडिया से बातचीत में कहा कि वर्ष 2013 से लिपिकों के ग्रेड पे बढ़ाने की मांग उठाते आ रहे हैं, उस दौर में संगठन की ओर से जयपुर में जो धरना दिया गया था, तब अशोक गहलोत ने आश्वासन दिया था कि कनिष्ट सहायकों के ग्रेड पे में बढ़ोत्तरी की जाएगी, लेकिन लंबा समय बीतने के बाद भी मंत्रालियक संवर्ग की सुनवाई नहीं हो रही है।

व्यास ने कहा कि ग्रेड पे नहीं बढऩे से पूरे प्रदेश में जो मंत्रालियक कर्मचारियों में इससे आक्रोश है। उन्हें हर हाल में ग्रेड पे 3600 हर हाल में चाहिए। इन कर्मचारियों (बाबू) के अलावा संवर्ग के जो कार्मिक थे, उन्हें कनिष्ट सहायकों से कम वेतन मिलता था, लेकिन आज वो इनसे ज्यादा वेतन पा रहे हैं, कनिष्ट लिपिक फिर पिछड़ गए हैं। इसके लिए संगठन स्तर पर पूरजोर ढंग से संघर्ष जारी है, सरकार से गे्रड पे बढ़ाकर ही दम लेंगे।

शासन की रीड़ है कार्मिक…

मदनमोहन व्यास ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले भी जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तो आंदोलन किए, फिर भाजपा सरकार आई तब भी अपने हक के लिए संघर्ष करना पड़ा लेकिन सरकारें मंत्रालयिक कार्मिकों को तोलना चाहती है, जबकि यह कार्मिक सरकार की रीड होते हैं।

एकजुटता जरूरी होगी…

आगे की रणनीति के सवाल पर व्यास ने बताया कि यह मांग केवल एक कार्मिक या संगठन की नहीं है, यह लड़ाई हक की है। इससे पहले भी सभी मंत्रालयिक कार्मिक एकजुट हुए थे, तब संघर्ष समिति बनी थी, मगर आज कर्मचारी फिर से बंटे हुए है।

अब वक्त आ गया है कि एक बार फिर से सभी कर्मचारियों को एकजुटता दिखाते हुए आगे बढऩा होगा, तभी सरकार की नींद खुलेगी, वहीं सरकार को भी चाहिए पूर्व में आश्वासन दिया था, तो उस पर अमल करना चाहिए।

जारी रहेगा संघर्ष…

संगठन के संभागाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने कहा कि कनिष्ठ सहायक (लिपिक ग्रेड द्वितीय) का हक है कि उनका ग्रेड पे 3600 हो, यह लेकर ही दम लेंगे। इसके लिए संघर्ष लगातार जारी रहेगा। आचार्य ने बताया कि कर्मचारियों के पांच सूत्री मांग पत्र को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भेजा है।

इसमें वर्ष 2016 में हुए समझौते के अनुरुप मंत्रालयिक संवर्ग के अराजपत्रित एवं राजपत्रित पदों का नवीन सृजन करने, पदों में व्याप्त असमानता को दूर करते हुए पदोन्नति प्रावधान एवं वेतन में समानता की जाए।

वेतन वसूली की अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से प्रतिहारित करने और शिक्षा विभाग के निदेशालय सहित सभी राज्य स्तरीय, संभाग स्तरीय, जिला स्तरीय एवं ब्लॉक स्तरीय कार्यालयों से शैक्षिक संवर्ग के स्टाफ पदों को समाप्त करने की मांग रखी गई है।

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