Tuesday, June 23, 2026
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एसकेआरएयू : 57 शिक्षकों की होगी पदोन्नति, 8 वर्ष बाद करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत की जाएगी पदोन्नति

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बीकानेर Abhayindia.com स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (एसकेआरएयू) के शैक्षणिक स्टाफ को करीब 8 साल बाद करियर एडवांसमेंट स्कीम का लाभ मिल सकेगा। अशैक्षणिक कार्मिकों की पदोन्नति के बाद अब शैक्षणिक कार्मिकों को भी पदोन्नति का लाभ देने के लिए अनुमति के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है। इनमें से कई शिक्षक तो वर्ष 2020 से पदोन्नति की योग्यता रखते हैं, लेकिन इसके बावजूद सीएएस प्रकिया नियमित नहीं होने के चलते कार्मिकों को पदोन्नति का लाभ नहीं मिल सका था।

कुलगुरु डॉ आरबी दुबे ने बताया कि पदोन्नति प्रक्रिया में स्टेज 1 (सहायक आचार्य (एजीपी6000) से स्टेज 2 (एजीपी 7000 ) में पदोन्नति के लिए 20 सहायक आचार्य योग्य पाए गए हैं। इसी प्रकार स्टेज 2 (एजीपी 7000) से स्टेज 3 (एजीपी 8000) के लिए 23 शिक्षकों द्वारा आवेदन दिए गए हैं। एसोसिएट प्रोफेसर स्टेज 4( एजीपी 9000) से प्रोफेसर स्टेज 5 (एजीपी 10000) के लिए 14 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इस प्रकार विभिन्न श्रेणियों में कुल 57 शिक्षकों द्वारा सीएएस के लिए आवेदन लिए गए हैं।

कुलगुरु ने बताया कि पात्र शिक्षकों को विश्वविद्यालय द्वारा किसी भी प्रकार का शपथ पत्र देने का आदेश जारी नहीं किया गया है। विश्वविद्यालय के टीचिंग स्टाफ के मनोबल को मजबूती देने के लिए सीएएस प्रक्रिया को शीघ्र करवाने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत विभिन्न विषयों और विभागों के 57 आवेदनों को योग्यता के अनुरूप निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए योग्य पाए जाने पर शैक्षणिक स्टाफ की शीघ्र पदोन्नति की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह संपूर्ण प्रक्रिया यूजीसी रेगुलेशंस 2010 के अनुरूप कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत की जा रही हैं इस स्कीम के तहत कार्मिकों से आवेदन लिए गए हैं तथा स्क्रीनिंग प्रक्रियाधीन है।

यह है योग्यता

डॉ दुबे ने बताया कि सहायक आचार्य के स्टेज 1 से स्टेज 2 में पदोन्नति के पीएचडी के साथ 4 वर्ष तथा बिना एचडी के 6 वर्ष की योग्यता होना आवश्यक है। स्टेज 2 से स्टेज 3 में 5 वर्ष का अनुभव आवश्यक है जबकि स्टेज 3 से स्टेज 4 में जाने की योग्यता 3 वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य है। आवेदन के पश्चात इस प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए बाहर से विशेष विशेषज्ञों के माध्यम से स्क्रीनिंग की जाएगी तथा इसके पश्चात पदोन्नति की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। इसी प्रकार एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर बनने के लिए 3 वर्ष का अनुभव अनिवार्य है। एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर की पदोन्नति के लिए सीधी भर्ती के अनुरूप ही प्रक्रिया अपनाते हुए गठित बोर्ड के माध्यम से साक्षात्कार लिए जाएंगे।

अशैक्षणिक कार्मिकों को भी दिया
गया था पदोन्नति का लाभ

कुलगुरु के प्रयासों से विश्वविद्यालय के 27 अशैक्षणिक कार्मिकों को भी पदोन्नति का लाभ दिया गया है। निजी सचिव, सहायक लेखाधिकारी द्वितीय, लिपिक ग्रेड प्रथम, सहायक अनुभाग अधिकारी, अनुभाग अधिकारी, सहायक लेखाधिकारी प्रथम तथा कनिष्ठ लिपिक वर्ग में पदोन्नति की जा चुकी है। अशैक्षणिक कर्मचारी नियुक्ति एवं पदोन्नति नियम-1998 के नियम-28 के अन्तर्गत गठित समिति की अनुशंषा पर कुलगुरू प्रोफेसर दुबे द्वारा इन कार्मिकों की पदोन्नति का अनुमोदन किया गया था।

पेंशन समस्या समाधान के लिए प्रयास जारी

डॉ दुबे ने बताया कि विश्वविद्यालय के पेंशनर्स को नियमित पेंशन (60 प्रतिशत डीए भुगतान) व अन्य परिलाभ मिले, इसके लिए राज्य सरकार के साथ सतत् संवाद कर समाधान के प्रयास किए जा रहा है। विश्वविद्यालय का पेंशन संबंधी करीब 150 करोड़ रुपए का दायित्व बकाया है। विश्वविद्यालय में सेवारत कार्मिकों का वेतन या डीए एरियर बकाया नहीं है। केवल ऑडिट आक्षेप या वसूली की दशा में ग्रेच्युटी या पीएल में कटौती की जाती है अन्य प्रकरणों में समस्त भुगतान समयबद्ध रूप से किया जा रहे हैं। विश्वविद्यालय द्वारा ग्रेच्युटी का भुगतान प्रक्रियधीन है जिसे शीघ्र पूर्ण कर लिया जाएगा। पूर्व में पेंशन एवं पीएफ का एक ही खाता था जिस कारण पीएफ की राशि का पेंशन भुगतान में उपयोग ले लिया गया, जिसकी प्रतिपूर्ति विश्वविद्यालय द्वारा करने का प्रयास किया जा रहा है।

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