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सामाजिक कार्यकर्त्‍ता ने बीकानेर रेलवे स्‍टेशन को लेकर उठाई अहम मांगें, पत्र में रखा मजबूत ऐतिहासिक पक्ष

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बीकानेर Abhayindia.com सामाजिक कार्यकर्त्‍ता चौरू लाल सुथार ने रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव को एक पत्र भेजकर बीकानेर रेलवे स्‍टेशन से संबंधित कई अहम मांगें रखते हुए इसके ऐतिहासिक पहलू की ओर भी ध्‍यान आकर्षित किया है। पत्र की प्रतिलिपियां सभी जनप्रतिनिधियों व रेलवे के उच्च अधिकारियों को भी भेजी गई है।

सामाजिक कार्यकर्त्‍ता सुथार ने अवगत कराया है कि राजस्थान राज्य के बीकानेर रियासत काल मे बीकानेर रेलवे स्टेशन का निर्माण बीकानेर रियासत काल के तत्कालीन महाराजा स्वर्गीय गंगा सिंह के कार्यकाल में 1891 में यहां के राय बहादुर दीवान सर कस्तूरचंद डागा द्वारा रेलवे स्टेशन के निर्माण के लिए गिफ्ट की गई राशि ₹3.46 लाख से करवाया गया था। 1891 में जोधपुर और बीकानेर के दोनों राज्यो में राजपूताना एजेंसी के भीतर संयुक्त रूप से रेलवे विकास को बढ़ावा देने के लिए जोधपुर-बीकानेर रेलवे का गठन किया गया। 1891 में 1000 मि.मी. (3 फिट 33918 इंच) चौड़ी मीटर गेज लाइन को बठिंडा तक बढ़ाया गया था। बीकानेर रेलवे स्टेशन भारतीय राज्य राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित है तथा बीकानेर रेलवे डिवीज़न का मुख्यालय है।

सुथार ने बताया कि रेल मंत्रालय,भारत सरकार  ने बीकानेर रेलवे स्टेशन को रिडेवलपमेंट करने के लिए इसे 10 मंजिला इमारत के रूप में निर्माण कर सभी यात्रियों को लग्जरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए “अम्रत भारत स्टेशन योजना” के अंतर्गत करीब 382 करोड़ रुपये स्वीकृत किये है।

सुथार ने रेलवे स्‍टेशन का ऐतिहासिक पक्ष के बारे में अवगत कराया है कि बीकानेर महाराजा गंगा सिंह ने अपने निजी खर्च पर 1872 में रेलगाड़ी की शुरुआत की। इसके बाद बीकानेर को रेल से जोड़ा और वह भारत के रेल नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। जोधपुर से बीकानेर तक रेलगाड़ी लाने के लिए पहले प्रयास करने वाले महाराजा गंगा सिंह उन राजाओं में से एक थे जिन्होंने अपने ही खर्च पर इस परियोजना को पूरा किया।

सुथार ने बताया कि पहली गाड़ी 09 मार्च 1885 को जोधपुर से लूणी तक चलाई गई। 1891 में जोधपुर-बीकानेर के मध्य एक रेलवे लाइन पूरी हुई जिसका उद्घाटन 23.12.1891 को  मि. कर्नल एच. ट्रेवर, जो उस समय राजपूताना के लिए भारत सरकार के एजेंट थे द्वारा किया गया। इसके बाद नई जोधपुर रेलवे को 1898 में जोधपुर-बीकानेर के साथ जोड़ा गया। उस समय महाराजा गंगा सिंह मेयो कॉलेज, अजमेर में अध्ययनरत थे। बीकानेर-जोधपुर रेल लाइन शुरू किए जाने के इस अवसर पर वे भी समारोह में उपस्थित रहे। ब्रिटिश हुकूमत के समय जिले का पहला रेलवे स्टेशन बीकानेर स्टेट के महाराजा गंगा सिंह के गांव देपालसर में बनवाया गया था।

महाराजा गंगा सिंह एकअति दूर द्दृष्टि के महाराजा थे जिन्होंने आजादी से पूर्व ही 1926 में यहां के लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए एक रेल /कारखाने की स्थापना कर रेलवे के संसाधन बढ़ाने में महत्वपूर्ण जनहित का कार्य किया, जो आज भी बदस्तूर संचालित है। यहां रेल के डिब्बों की रिपेयरिंग आदि का कार्य कुशल कार्मिकों द्वारा किया जाता है। बीकानेर के लिये  विकास की गंगा बहाने वाले महाराजा गंगा सिंह जी का नाम आज भी बड़ी इज्जत व सम्मान से लिया जाता है व उनको यहां का भगीरथ भी कहा जाता है। आज हम बड़े ही गर्व के साथ कहते है कि बीकानेर को भारत के पटल पर अपनी अहम पहचान बनाने वाले कोई और नही बल्कि बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह ही थे।

सुथार ने इसी के साथ मंत्री से यह भी आग्रह किया कि बीकानेर जंक्शन का नाम बदलकर “महाराजा गंगा सिंह बीकानेर जंक्शन” रखा जाए। यह यहां की जन भावना है जिससे क्षेत्रीय जनता को बड़े ही गर्व का अनुभव होगा और आने वाली पीढियां उनके योगदान को सदेव याद रखेगी। उनकी स्मृति को चिरस्थाई बनाने एवं नई पीढ़ी को उनके कार्यों से अवगत कराने के लिए यही उनके योगदान को सच्ची श्रद्धांजलि होगी व यह ऐतिहासिक दृष्टि से भी उचित व न्याय संगत होगा।

सुथार ने रेल मंत्री के साथ-साथ यहां के सभी जनप्रतिनिधियों व रेलवे के उच्च सधिकारिओं से आग्रह किया है कि बीकानेर रेलवे स्टेशन के रिडेवलपमेंट के लिए स्वीकृत बजट के अंतर्गत रेलवे के मुख्य प्रवेश द्वार के अंदर ठीक सामने स्वर्गीय महाराजा गंगा सिंह की एक विशाल भव्य स्टेच्यू जो घोड़े पर सवार हो (जैसा कि बीकानेर स्थित पब्लिक पार्क में स्थापित है उसी की तर्ज पर), स्वीकृत बजट राशि मे से या अतिरिक्त बजट स्वीकृत कर स्थापित करवाने का प्रयास करें।

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