








जयपुर Abhayindia.com राजस्थान कांग्रेस में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई है। इस बीच खबर आई है कि इस बार कांग्रेस नया प्रयोग करने जा रही है। इसके अंतर्गत नवनियुक्त जिलाध्यक्षों को तीन महीने की ‘प्रोबेशन’ अवधि पर लगाया जाएगा। यानी नए जिलाध्यक्षों की फरफारमेंस की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) द्वारा एक विशेष समिति बनेगी।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से मीडिया में आए बयान के अनुसार, नए फॉर्मेट के तहत जिला अध्यक्ष को तीन माह की प्रोबेशन पर रखा जाएगा और विशिष्ट जिम्मेदारियां दी जाएंगी। प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं हुआ तो उन्हें बदला जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो यह प्रयोग आने वाली राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
आपको बता दें कि कांग्रेस ने राजस्थान में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्तियों के लिए पर्यवेक्षकों लगाए थे, जिन्होंने संभावित जिला अध्यक्षों पर फीडबैक एकत्र किया। इसके बाद 48 संगठनात्मक जिलों में से हर जिले के लिए 6-6 नामों का पैनल तैयार कर हाईकमान को भेज दिया गया। बारां और झालावाड़ को उपचुनावों के कारण फिलहाल इसमें शामिल नहीं किया गया है।
इधर, दिल्ली में शुक्रवार को कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने राजस्थान के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए पर्यवेक्षकों से सुबह 11 बजे से शाम तक विस्तृत फीडबैक लिया। इस दौरान राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के साथ अलग-अलग चर्चा की गई।
इससे पहले, पर्यवेक्षकों के फीडबैक से पूर्व डोटासरा और जूली ने प्रभारी रंधावा के दिल्ली स्थित आवास पर एक अहम बैठक की थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने रंधावा को जिलों की स्थिति और संभावित नामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। रंधावा ने यह फीडबैक वेणुगोपाल और संगठन के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ साझा किया। अब यह रिपोर्ट राहुल गांधी के पास भेजी जाएगी, जिनके अनुमोदन के बाद अंतिम सूची जारी होगी।


