Hometrendingबॉर्डर पर धार्मिक स्थलों को तोड़े जाने के विरोध में निकली आक्रोश...

बॉर्डर पर धार्मिक स्थलों को तोड़े जाने के विरोध में निकली आक्रोश रैली, गोविंदराम मेघवाल ने भरी जोरदार हुंकार

AdAdAdAdAdAdAdAdAdAdAd

बीकानेर Abhayindia.com बीकानेर जिला कलेक्ट्री परिसर स्थित कर्मचारी मैदान में, बिश्नोई धर्मशाला के सामने आज एक विशाल महापड़ाव, सर्वधर्म सभा और आक्रोश रैली का ऐतिहासिक आयोजन किया गया। यह आयोजन डॉ. आंबेडकर टाइगर फोर्स, संविधान न्याय सभा, किसान ब्रिगेड एवं संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वावधान में सीमावर्ती क्षेत्रों में बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के तोड़े गए धार्मिक स्थलों के विरोध में किया गया। कार्यक्रम में बीकानेर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से सभी धर्मों के लगभग 20,000 लोग अपनी एकजुटता दिखाने और सामाजिक सौहार्द की रक्षा के लिए एकत्रित हुए। इस विशाल महापड़ाव को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री गोविंद राम मेघवाल ने बिंदुवार भाषण देते हुए केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर जमकर प्रहार किए।

पूर्व मंत्री गोविंद राम मेघवाल ने कहा कि 20 जून 2026 को खाजूवाला क्षेत्र के बांडका, पहलवान का वैरा और आडूरी में बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के जिन धार्मिक स्थलों को तोड़ा गया, उनसे स्थानीय और आसपास के सभी धर्मों के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई थी। इसके विरोध में जब 25 जून 2026 को पूगल में एक बैठक की गई, तो लोगों ने बताया कि इस कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में भय का माहौल है। प्रशासन इन स्थलों को ढहाने के लिए इस तरह पुलिस, बंदूकें, हथियार और डंडे लेकर पहुंचा जैसे कि वहां कोई आतंकवादी छुपे हुए हों। उन्होंने याद दिलाया कि देश की आजादी में मुसलमानों ने भी अपना पूरा योगदान दिया था।

मेघवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने सबसे पहले नारा दिया था कि किसानों का कर्ज माफ करेंगे, लेकिन नहीं किया। वादा किया था कि किसानों की आय दोगुनी होगी, पर वह भी नहीं हुई। ‘अच्छे दिन’ आने का वादा था, लेकिन कमरतोड़ महंगाई के कारण वे दिन भी नहीं आ रहे हैं। साल में 2 करोड़ रोजगार देने के बजाय आज देश में निजीकरण (प्राइवेटाइजेशन) को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने नोटबंदी करके देश में रुपए का भारी संकट पैदा कर दिया। वहीं, गलत तरीके से लागू की गई जीएसटी (GST) के कारण छोटे व्यापारी और उनके व्यापार पूरी तरह बर्बाद हो गए. दिनाक 02.04.2018 को संविधान में अपने हक के लिए शांतिपूर्ण ढंग से लड़ रहे दलित समाज के 18 दलितों को इस शासन में शहीद करवा दिया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पुलवामा हमले के बाद शहीदों के नाम पर वोट तो मांगे गए, परंतु यदि सरकार थोड़ी सी संवेदनशीलता दिखाती और तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक के अनुसार सैनिकों को हवाई सेवा (एयरक्राफ्ट) उपलब्ध करा देती, तो इस बड़े आत्मघाती हमले को आसानी से रोका जा सकता था।

सरकार की नीतियों पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि देश के सभी प्रमुख सरकारी उपक्रम- चाहे वह बीएसएनएल हो, एयरपोर्ट हो, आकाश, पाताल या समुद्र हो- सब कुछ अडानी और अंबानी के हवाले किया जा रहा है. जब हमारे नेता राहुल गांधी संसद में इन जनहित के मुद्दों को लेकर आवाज उठाते हैं, तो सरकार उन पर ईडी (ED) भेज देती है. लेकिन राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा है कि उनके नाना पंडित जवाहरलाल नेहरू 14 साल तक अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जेल में रहे थे; वे जनता की भलाई की आवाज उठाने के लिए जेल जाने से बिल्कुल नहीं डरते।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार में खुद उनके अपने मंत्री और विधायक तक असुरक्षित महसूस करते हैं और वे खुद बार-बार अपनी ही सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहते हैं. उन्होंने स्थानीय राजनीति पर तंज कसते हुए कहा कि दिनाक 20.06.26 को हमारे धार्मिक स्थल शहीद किए गए और अगले ही दिन दिनाक 21.06.26 को योग दिवस के नाम पर खाजूवाला विधायक विश्वनाथ मेघवाल योग कर रहे थे। उन्हें और यहां के सांसद को सभी धर्मों के लोगों ने वोट दिए थे, लेकिन इस दमनकारी कार्रवाई पर भाजपा के न तो विधायक ने और न ही सांसद ने कोई आवाज उठाई।

मेघवाल ने कहा कि आज लोगों की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाई जा रही है, संविधान को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और आरक्षण के नाम पर मजाक किया जा रहा है। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने संविधान में सभी को बराबर का दर्जा दिया था और कहा था कि जिस दिन जनता ने अपने वोट की ताकत पहचान ली, उस दिन भ्रष्टाचारी लोग वोट के लिए तरसेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में भाजपा के लोग भोली-भाली जनता को बरगलाते हैं और हिंदू-मुस्लिम के नाम पर वोट बटोरते हैं, जिसके कारण आज देश के बड़े व्यापार और संसाधनों पर भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों का कब्जा हो चुका है. यह सब अपनी ‘गोदी मीडिया’ के बल पर किया जा रहा है, जो जनता को सिर्फ वही दिखाती और सुनाती है जो सरकार के पक्ष में हो।

महापड़ाव के माध्यम से मुख्यमंत्री
को प्रेषित प्रमुख मांगें...

इस विशाल सभा के बाद जिला कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, माननीय मुख्यमंत्री, राजस्थान सरकार को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें निम्नलिखित मांगें त्वरित निस्तारण हेतु रखी गईं:

ग्राम बांडका की मस्जिद, पहलवान का वैरा की दरगाह और आडूरी की दरगाह का प्रशासनिक स्तर पर शासकीय खर्च से ससम्मान पुनःनिर्माण कराया जाए.

सीमावर्ती क्षेत्रों में अन्य किसी भी धार्मिक स्थल को ढहाने की संभावित कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए और बिना उचित कानूनी प्रक्रिया व प्रायर नोटिस के कोई कदम न उठाया जाए.

बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के कथन  ‘‘संविधान भारत की आत्मा है, जब तक संविधान है मेरी आत्मा जीवित है’’ की मूल भावना के विपरीत वर्तमान में कुछ राजनीतिक व सामाजिक संगठनों द्वारा एक सोची-समझी रणनीति के तहत ऐसे कृत्य किए जा रहे हैं जो हमारे संविधान के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को कमजोर करने का प्रयास करते हैं, अतः भारत के संविधान के मूल ढांचे और इसकी धर्मनिरपेक्ष भावना के साथ की जा रही इस छेड़छाड़ और ऐसे कृत्यों को तुरंत प्रभाव से रोका जाये।

अयोध्या में श्रीराम मंदिर में हुई राशि की कथित लूट की जांच रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर या सीबीआई (CBI) से कराई जाए. इसी तरह काशी और मथुरा जैसे अन्य बड़े धार्मिक स्थलों में भी मंदिर राशि की लूट व चोरी संबंधी शिकायतों की उच्च स्तरीय जांच करवाकर दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए.

बीकानेर जिले के सभी अनधिकृत/बिना पट्टे वाले धार्मिक व सार्वजनिक स्थलों (मस्जिद, मंदिर, दरगाह, गुरुद्वारा, ईदगाह, मदरसे, श्मशान भूमि और कब्रिस्तान) के लिए जिला प्रशासन को निर्देशित कर विशेष कैंप चलाए जाएं और नियमानुसार त्वरित पट्टे जारी किए जाएं.

बीकानेर जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में वर्षों से बसे परिवारों को बेदखली के डर से मुक्त करने के लिए तुरंत विशेष अभियान चलाकर जमीनों का सर्वे व सीमांकन किया जाए, उन्हें आधिकारिक रूप से “आबादी क्षेत्र” घोषित किया जाए और काबिज परिवारों को मालिकाना हक (पट्टा) दिया जाए.

इस महापड़ाव और सर्वधर्म सभा को पूर्व मंत्री गोविंद राम मेघवाल के अलावा मंच से कई मुख्य वक्ताओं ने संबोधित किया, जिनमें प्रमुख रूप से सद्दाम भाटी (सरपंच छत्तरगढ़), पीर मकबूल शाह, रामकुमार तेतरवाल (पीसीसी सदस्य), मकसूद अहमद , रामधन मेघवाल (अध्यक्ष, सामाजिक न्याय सभा), नूर मौ. जालवाली, मुफ्ती जमील अहमद, गोविंदराम मूंड (पूर्व सरपंच मूंडसर), अशोक जाखड़ (प्रधान घड़साना), रामा बावरी जी, रफीक मालवत लूणकरणसर, रफीक शाह जी, राजेंद्र नौसरिया, महावीर कस्वां (अध्यक्ष किसान ब्रिगेड), कमरुद्दीन शाह जी और प्रकाश सिंह जोशा शामिल थे।

AdAdAdAdAdAdAdAdAdAd
- Advertisment -

Most Popular