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खाद्य सुरक्षा पर ध्यान देने की जरुरत, वेटरनरी में राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित…

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बीकानेरAbhayindia.com वेटरनरी विश्वविद्यालय की ओर से वेटरनरी इंटरनल एवं प्रिवेंटिव मेडिसिन सोसाइटी एवं इंटास एनिमल हैल्थ के संयुक्त तत्वावधान में ‘एंथ्रोपोसीन युग में एनिमल प्रोडक्शन मेडिसिन’ विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया।

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इसमें देश के विभिन्न राज्यों से 788 पशु चिकित्सकों ने भागीदारी निभाई। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने कहा कि जूनोटिक बीमारियों के कारण आज पशुचिकित्सकों का महत्व बढ़ गया है। हमें समग्र अप्रोच के माध्मय से पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों को नियंत्रण करना होगा।

कुलपति ने कहा कि आज पशु उत्पादन जैसे दूध, मांस, अण्डा व मछली इत्यादि की मांग बढ़ रही है। आज खाद्य सुरक्षा पर भी ध्यान देने की जरूरत है जिस पर आज के पशुचिकित्सक अपना योगदान दे सकते है। वेबिनार के मुख्य वक्ता वेटरनरी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. ए.के. गहलोत ने बताया कि 75 प्रतिशत जूनोटिक बीमारिया का उदभव पशुओं से होता है।

इसलिए आज के युग में प्रोडक्शन मेडिसिन की महत्ता बढ़ गई है। इसका मुख्य उद्देश्य पशु स्वास्थ्य संबंधित बहुआयामी ज्ञान एवं कौशल का समुचित उपयोग कर पशुओं में बीमारियों को कम करके इनकी उत्पादन क्षमता को बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि पशु औषधीय उत्पादन और पशु स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ही हम मनुष्य के स्वास्थ्य के रक्षा कर सकते हैं।

राष्ट्रीय वेबिनार की आयोजन सचिव डॉ. दीपिका धूडिय़ा ने बताया कि वेबिनार में देश के विभिन्न राज्यों के 788 पशुचिकित्सकों एवं पशु औषध विज्ञान विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इस दौरान सोसाइटी के महासचिव डॉ. अशोक कुमार,डॉ. नितिन भाटिया, डॉ. मुकेश श्रीवास्तव, धर्मसिंह मीणा, डॉ. जे.पी. कच्छावा, डॉ. निलेश शर्मा, डॉ. एस.के. रावल, डॉ. सिद्दकी, डॉ. सुधीर मेहता, डॉ. निलेश सिंधु व डॉ. एस.के. गुप्ता ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।

 

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