Hometrendingमरीज भार को देखते हुए चिकित्सा संस्थानों में चिकित्सकों एवं अन्य स्टाफ...

मरीज भार को देखते हुए चिकित्सा संस्थानों में चिकित्सकों एवं अन्य स्टाफ को करें नियोजित, मंत्री ने दिए निर्देश

AdAdAdAdAdAdAdAdAd

बीकानेर Abhayindia.com चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने मानसून को देखते हुए डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया एवं स्क्रब टाईफस सहित विभिन्न मौसमी बीमारियों की रोकथाम एवं बचाव के लिए सभी प्रकार की आवश्यक तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी संयुक्त निदेशकों एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों व फील्ड में लगे स्वास्थ्य कार्यकर्ता, चिकित्सकों सहित विभिन्न अधिकारियों को एक्टिव रहते हुए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

चिकित्सा मंत्री ने बुधवार को स्वास्थ्य भवन में मौसमी बीमारियों, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य गतिविधियों, चिकित्सा संस्थानों में उपकरण, जांच एवं दवाईयों की उपलब्धता सहित विभिन्न बिन्दुओं पर विस्तार से समीक्षा कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा भवनों की समय पर रिपेयर/ मेंटेनेंस पूर्ण करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि चिकित्सा संस्थानों के जर्जर होने,  रिपेयर/ मेंटनेंस के अभाव में किसी भी प्रकार दुर्घटना न हो। ऐसा होने पर  संबंधित चिकित्सा अधिकारी के साथ-साथ संयुक्त निदेशक एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की भी जिम्मेदारी  होगी। उन्होंने चिकित्सा उपयोग हेतु तैयार भवनों को संबंधित जन-प्रतिनिधि से समन्वय स्थापित कर तत्काल लोकापर्ण करवाने व संचालित करने के निर्देश दिए हैं।

खींवसर ने कहा कि प्रदेशभर में संचालित होने वाली फर्स्ट रैफरल यूनिट्स एवं ट्रोमा सेंटर्स में आवश्यक तीन चिकित्सक यानि ट्रायो पूर्ण होना चाहिए। इस कार्य को आगामी एक माह में पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने प्रत्येक चिकित्सा संस्थान में आवश्यक जांच एवं दवाईयों की उपलब्धता, उपकरणों की क्रियाशीलता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि निःशुल्क जांच सेवाओं के लिए संचालित हब एंड स्पॉक मॉडल के तहत मरीज को वाट्सएप पर 24 घंटे में रिपोर्ट मिल जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकांश उच्च चिकित्सा संस्थानों में सीटी-एमआरआई जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है। जिन संस्थानों में सीटी-एमआरआई जांच सेवाएं उपलब्ध नहीं है, वहां पीपीपी मोड पर शुरु किया जाए।

चिकित्सा मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में मैनपावर की कमी नहीं रहे, इसके लिए राज्य सरकार ने प्रदेशभर में लगभग 38 हजार से अधिक चिकित्सक, नर्सिंग एवं अन्य पैरामेडिकल स्टाफ के पदों पर नियुक्तियां की हैं। शेष पदों पर नियुक्ति की कार्यवाही जारी है।  चिकित्सा संस्थानों में मरीज भार को देखते हुए चिकित्सकों एवं अन्य स्टाफ को नियोजित किया जाए। सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी स्थिति में एक पद पर एक से अधिक लोग नहीं रहें। उन्होंने कहा कि चिकित्सा संस्थानों में स्थापित क्लोज सर्किट कैमरा खराब होने पर जिम्मेदारी संबंधित प्रभारी की होगी। जहां कैमरे नहीं लगे हैं, तत्काल इंस्टॉल करवायें।

खींवसर ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य गतिविधियों, एएनसी रजिस्ट्रेशन, जांच सेवाओं की उपलब्धता एवं इनके फॉलोअप आदि कार्यों की विस्तार से समीक्षा कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने  ग्रामीण क्षत्रों में उच्च जोखिम के लक्षणों वाली गर्भवती महिला की समय पर पहचान, समय-समय पर इनकी जांच सेवाओं एवं सुरक्षित प्रसव तक पूर्ण निगरानी के निर्देश दिए।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड ने कहा कि प्रदेशभर के सभी डिलीवरी पॉइन्ट्स के स्त्रीरोग विशेषज्ञों की संबंधित जिले के मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा मेंटरिंग शुरु की गई है। उन्होंने इसे नियमित रुप से जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उप स्वास्थ्य केन्द्र के लेकर मेडिकल कॉलेज स्तर तक यह ध्यान रखा जाए कि गर्भवती महिला को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि चिकित्सा संस्थानों में गर्भवती महिला को अटेंड करने के लिए प्रसव सखी कार्यक्रम शुरु किया जा चुका है। उन्होंने रेफरल व्यवस्था को और मजबूत करने पर बल दिया। बैठक में मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल, आरएमएससीएल प्रबंध निदेशक पुखराज सैन, एनएचएम अतिरिक्त मिशन निदेशक  डॉ. टी. शुभमंगला, आरसीएच निदेशक डॉ. मधु रतेश्वर भी मौजूद थे।

AdAdAdAdAd
- Advertisment -

Most Popular