Sunday, June 21, 2026
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पीड़ा निवारण में जुटे गायत्री परिजन-लोगों के कान-कंधा बने :  डॉ. चिन्मय पंडया

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बीकानेर abhayindia.com देव संस्कृति विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि कोरोना महामारी के बीच हम सबकी जिम्मेदारी लोगों के दुख, दर्द और कठिनाई को कम करने की है, क्योंकि आज हर परिवार तकलीफ में है। इसलिए हमें लोगों के कान और कंधा बनना है। हम दुखी लोगों के दर्द को सुने और उनका सहारा बने। भले ही वे गायत्री परिवार के सदस्य नहीं हो। इतना भी कर देंगे तो दुःखी व्यक्ति का आधा दुःख दूर हो जाएगा।

 

डॉ. चिन्मय पंडया अखिल विश्व गायत्री परिवार, राजस्थान जोन की वर्चुअल संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। शांतिकुंज हरिद्वार से संचालित ऑनलाइन संगोष्ठी में प्रदेशभर से करीब 900 कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही। डॉ. चिन्मय पंडया ने कहा कि गायत्री परिवार का उद्देश्य ही पीड़ा निवारण है, इसलिए कोई भी कार्यकर्ता इससे अछूता नहीं रहे। जो लोग किसी परेशानी में नहीं है, हमें उनके जीवन का भी नवीनीकरण करना है। उनके चिंतन और दृष्टिकोण को और बेहतर बनाने के कार्य करना है। क्योंकि परिस्थितियों को बदलना हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन लोगों की मन: स्थिति बदलने के प्रयास तो किए जा सकते हैं। उन्होंने भविष्य के लिए जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की दिशा में भी कार्य करने के लिए प्रेरित किया। डॉ. पंड्या ने युवा संगठन (DIYA) दिया राजस्थान द्वारा किये जा रहे सेवा कार्यों की प्रशंसा की वहीं दिया बीकानेर द्वारा चलाये जा रहे प्लाजमा डोनेशन एवं रक्तदान कार्यक्रम को आज के समय की जरूरत बताया।

 

 

गायत्री परिवार के केंद्रीय जोनल समन्वयक डॉ. ओम प्रकाश शर्मा ने कहा कि आज यज्ञ को चिकित्सा में बदलने की आवश्यकता है। समग्र स्वास्थ्य के लिए यज्ञोपैथी से बढ़कर सस्ता और सुलभ उपाय कोई दूसरा नहीं है। इसलिए लोगों को विशिष्ट हवन सामग्री के साथ प्रतिदिन हवन करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी में जहां भी आवश्यकता हो जरूरतमंद व्यक्ति को सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाए जाएं। साथ ही लोगों को आसन-प्राणायाम का अभ्यास करवाया जाना चाहिए। इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म अच्छा माध्यम है। आज की परिस्थितियों में गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं को जहां भी जिस सामान की आवश्यकता पड़े उसकी पूर्ति कर पीड़ा निवारण अभियान में सहयोग देना चाहिए, क्योंकि आज के युग की पुकार यही है।

 

 

घर-घर चले संस्कारों की परंपरा: 
आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी की केंद्रीय प्रभारी डॉ. गायत्री शर्मा ने कहा कि गृहे-गृहे यज्ञ के साथ घर-घर में संस्कार की परम्परा का चलाने की आवश्यक्ता है। यह कार्य ऑनलाइन भी संभव है। उन्होंने भविष्य की श्रेष्ठ संतानों के लिए पुंसवन संस्कार पर जोर देते हुए सभी को इसका ऑनलाइन प्रशिक्षण लेकर इसे जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। गायत्री परिवार राजस्थान जोन प्रभारी जय सिंह यादव ने राजस्थान में गायत्री परिवार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए आभार प्रकट किया। प्रारंभ में शांतिकुंज से मंच संचालन करते हुए गोपाल शर्मा ने कहा कि लॉकडाउन में हम अब क्षेत्र में नहीं जा सकते, इसलिए तकनीक के माध्यम से मिशन के कार्य करने होंगे। मोबाइल को क्रांति का हथियार बनाएं। गायत्री परिवार से जुड़ी वेबसाइट, एप, यू ट्यूब का न केवल स्वयं लाभ उठाए, वरन जन-जन को भी इससे लाभान्वित करें। किसी न किसी रूप में तकनीक के माध्यम से परम पूज्य गुरूदेव के विचारों को दुनिया में फेलाऐं। सुशील शर्मा ने गायत्री मंत्र उच्चारण और गुरु आह्वान किया। शांतिकुंज हरिद्वार के युवा उद्घाता बंधुओं द्वारा मुसीबत कितनी ही आए नाम मत रूकने का लेना…, हे प्रभु अपनी कृपा की छांव में ले लीजिए… प्रज्ञागीत के माध्यम से भाव संवेदन का जागरण किया गया।

 

 

हेल्पलाइन नंबर होंगे जारी:
गायत्री परिवार ओर से जिला, तहसील, उपखंड, जोन स्तर पर हेल्पलाइन गठित की जाएगी, यहां 24 घंटे मदद उपलब्ध होगी। हेल्पलाइन पर हॉस्पिटल में बेड, ऑक्सीजन, दवा, प्लाज्मा से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होगी। वर्चुअल संगोष्ठी में बीकानेर से प्रबंध ट्रस्टी पवन ओझा, जिला समन्वयक करनीदान चौधरी, ट्रस्टी देवेन्द्र सारस्वत, योगाचार्य शिव कुमार शर्मा, दिया जिलाध्यक्ष धनंजय सारस्वत, वित्तीय समिति के वरिष्ठ सदस्य भारत भूषण गुप्ता, आंदोलन समिति सदस्य शोभा सारस्वत तथा आपदा प्रबंधन समिति के शिवनरेश सिंह चौहान भी शामिल हुए।
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