Friday, April 24, 2026
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आपातकाल : जानिये, कुछ अनछुए पहलू, तब मच गई एक कॉल से खलबली

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नई दिल्ली। देश में 26 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा हो गई। इससे पहले 25 जून को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इस फरमान से पूरा मंत्रिमंडल अचंभित रह गया। सुबह 5 बजे मंत्रियों के आवास पर उनके बेसिक फोन पर पीएमओ की एक कॉल ने खलबली मचा दी। इंदिरा गांधी ने सभी मंत्रियों की सुबह 6 बजे बैठक के लिए बुलाया था। उस समय उनके सफदरजंग आवास पर केवल पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर राय ही मौजूद थे। प्रधानमंत्री आवास पर उस भाषण को अंतिम रूप दिया जा रहा था जिसे इंदिरा गांधी कैबिनेट बैठक के बाद रेडियो पर देने वाली थीं।

तब फखरुद्दीन अली अहमद देश के राष्ट्रपति थे। सुबह कैबिनेट की बैठक में आपातकाल के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल चुकी थी। अब उस पर अंतिम मुहर राष्ट्रपति को लगानी थी। प्रस्ताव पर हरी झंडी के लिए इंदिरा और सिद्धार्थ शंकर उस दिन शाम 5.30 बजे राष्ट्रपति भवन पहुंचे। दोनों नेताओं ने राष्ट्रपति को देश के हालात के बारे में अवगत कराया और आपातकाल की उपयोगिता बताई। इसके बाद आपातकाल के कागज राष्ट्रपति भवन में हस्ताक्षर के लिए भेज दिया गया। राष्ट्रपति फखरुद्दीन ने इंदिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधान की धारा 352 के तहत आपातकाल की घोषणा कर दी। आपातकाल की घोषणा रेडियो पर पहले कर दी गई तथा बाद में सुबह मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उस पर राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर किए गए।

दिग्गज नेताओं को डाल दिया जेल में

26 जून को तड़के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सोने की तैयारी में थीं। तभी विपक्ष के विरोध की गूंज उनके कानों तक पहुंचने लगी। समूचे देशभर में गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू हो चुका था। विपक्ष के कद्दावर नेता जयप्रकाश नारायण और मोरारजी देसाई को हिरासत में लिया जा चुका था। खास बात यह है कि पीएमओ से महज तीन लोगों की गिरफ्तारी की इजाजत नहीं थी। इनमें तमिलनाडु के नेता कामराज, बिहार के समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण के साथी गंगासरन सिन्हा और पुणे के एक और समाजवादी नेता एस. एम. जोशी। लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी, जॉर्ज फर्नांडीस आदि बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया। जेलों में जगह नहीं बची थी। इससे पहले 25 जून 1975 को जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा के इस्तीफा देने तक देश भर में रोज प्रदर्शन करने का आह्वान किया। 25 जून 1975 को राष्ट्रपति के अध्यादेश पास करने के बाद सरकार ने आपातकाल लागू कर दिया।

क्या है आपातकाल?

देश में आंतरिक अशांति को खतरा होने, बाहरी आक्रमण होने अथवा वित्तीय संकट की हालात में आपातकाल की घोषणा की जाती है। देश ने 1962 में चीन के साथ एवं 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान आपातकाल का दौर देखा था, पर यह बाहरी आक्रमण के कारण लगाया गया था। 25 जून 1975 की मध्यरात्रि से 21 मार्च 1977 के बीच जो आपातकाल का दौर देश ने देखा, वह आंतरिक अशांति के करण अनुच्छेद 352 के अंतर्गत लगाया गया था।

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