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ईंटों के भावों में लगी “आग”, कृत्रिम कमी दिखा कर हो रही मुनाफाखोरी, सीएम को भेजा पत्र

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बीकानेर Abhayindia.com बीकानेर में ईंटों के भाव आसमान छू रहे हैं। बीते कुछ दिनों में ही इसके भावों में पचास प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई है। बताया जा रहा है कि कृत्रिम कमी उत्पन्न कर मुनाफाखोरी की जा रही है। इसके बावजूद प्रशासन इस ओर ध्‍यान नहीं दे रहा। इस संबंध में बीकानेर सिटीजन एसोसिएशन के सामाजिक कार्यकर्त्‍ता दिनेश लखोटिया ने मुख्‍यमंत्री को पत्र भेजकर ईंट-भट्टों द्वारा अत्यधिक मूल्यवृद्धि, संभावित कालाबाज़ारी तथा 30 जून तक भट्टों की बंदी के आदेश पर पुनर्विचार की मांग की है।

पत्र में बताया गया है कि वर्तमान समय में प्रदेश में ईंटों के दामों में असामान्य एवं अत्यधिक वृद्धि ने आमजन के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। विगत लगभग 15–20 दिनों के भीतर ईंटों के मूल्य में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि होना न केवल बाजार की स्वाभाविक स्थिति के विपरीत है, बल्कि यह स्पष्ट रूप से कृत्रिम कमी उत्पन्न कर मुनाफाखोरी की ओर संकेत करता है। जो ईंटें हाल ही तक भट्टे पर लगभग चार हजार रुपये प्रति हजार के आसपास उपलब्ध थीं, वहीं आज पाँच हजार पाँच सौ रुपये या उससे अधिक में बेची जा रही हैं, जिससे आम नागरिक के लिए अपने घर का निर्माण करना अत्यंत कठिन हो गया है।

यह स्थिति केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक असमानता को भी बढ़ावा देने वाली है, क्योंकि मध्यम एवं निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए मकान बनाना जीवन का एकमात्र बड़ा सपना होता है। ऐसे में इस प्रकार की अनियंत्रित मूल्यवृद्धि उनके इस सपने को समाप्त करने की ओर अग्रसर है। विशेष रूप से यह भी परिलक्षित हो रहा है कि 30 जून तक ईंट-भट्टों को बंद रखने के आदेश के कारण बाजार में आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका लाभ उठाकर कुछ भट्टा संचालक मनमाने तरीके से कीमतें बढ़ा रहे हैं और आम उपभोक्ता का शोषण कर रहे हैं। साथ ही, अनेक स्थानों पर यह भी देखा जा रहा है कि ईंटों की बिक्री बिना विधिवत बिल के की जा रही है, नकद लेनदेन को प्राथमिकता दी जा रही है तथा वस्तु एवं सेवा कर (GST) और आयकर के नियमों का संभावित उल्लंघन हो रहा है। इस प्रकार की प्रवृत्तियाँ न केवल सरकारी राजस्व को क्षति पहुँचाती हैं, बल्कि बाजार व्यवस्था को भी असंतुलित करती हैं और ईमानदार व्यापारियों के लिए भी अनुचित प्रतिस्पर्धा उत्पन्न करती हैं।

पत्र में कहा गया है कि यह परिस्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि वर्तमान व्यवस्था में प्रभावी निगरानी एवं नियंत्रण का अभाव है। यदि समय रहते इस पर ठोस एवं कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या और अधिक विकराल रूप धारण कर सकती है तथा आमजन के लिए आवास निर्माण एक असंभव कार्य बन जाएगा।

पत्र में मांग की गई है कि इस गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लेते हुए आवश्यक प्रशासनिक एवं कानूनी हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जाए। ईंटों के दामों को नियंत्रित करने हेतु प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए, भट्टों की बंदी के आदेश पर व्यावहारिक पुनर्विचार किया जाए ताकि आपूर्ति संतुलित बनी रहे, तथा उन सभी भट्टा संचालकों एवं विक्रेताओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए जो कालाबाज़ारी या कर चोरी में संलिप्त पाए जाएँ। साथ ही, संबंधित विभागों द्वारा व्यापक स्तर पर निरीक्षण एवं जाँच अभियान चलाकर बाजार में पारदर्शिता एवं अनुशासन स्थापित किया जाए।

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