









बीकानेर Abhayindia.com बीकानेर मेंं टोल नाकों में फॉस्टैग वाले वाहनों से अधिक वसूली की जा रही है, टोलनाकों पर सरकार की ओर से निर्धारित जन सुविधाओं का भी अभाव है।
बीकानेर से फलौदी (जोधपुर) तक 159 किलोमीटर की दूरी की यात्रा पर तीन टोल नाकों में एक कार चालक को 145 व फॉस्टेंग एकाउंट में राशि नहीं होने पर दुगने रुपए यानि 290 रुपए चुकाने होते है। फास्टेंग प्रणाली में वापसी यात्रा कर की भी सुविधा बंद कर दी है।
टोल नाकों पर टोल टैक्स के तो बोर्ड अंकित है लेकिन फास्टेंग एकाउंट में राशि नहीं होने पर दुगना टैक्स होने, फॉस्टेग एकाउंट में राशि जमा करवाने के तरीके, बैंक आदि की सूचना नहीं लगाई है। टोल नाकों पर वाहन चालकों के लिए शीतल जल, टॉयलेट की भी सुविधाएं पूर्ण नहीं है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बीकानेर से जैसलमेर तक पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग 15 जो कांडला पोर्ट से अमृृतसर तक को बदलकर नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने राष्ट्रीय राजमार्ग (874 किलोमीटर) को बदलकर राष्ट्रीय राजमार्ग 11 कर दिया। इसमें जैसलमेर, बीकानेर, चूरू, सीकर व झुंझनूं (759) किलोमीटर शामिल कर दिया। नेशनल हाईवे संख्या 11 पहले आगरा से बीकानेर तक ही था। वर्ष 2014 में रेवाड़ी से राजस्थान के फतेहपुर तक 190 किलोमीटर लम्बे स्टेट राजमार्ग को फोर लाइन में बदलकर एन.एच.11 का नया दर्जा दिया।
राजस्थान के सबसे लम्बे राष्ट्रीय राज मार्ग में नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के माध्यम से इरकॉन ने तीन साल पहले 23 साल के लिए बीकानेर से जैसलमेर तक फोर लाइन राष्ट्रीय राज मार्ग को बनाकर समर्पित किया। इरकॉन 23 साल तक इस मार्ग पर चलने वाले वाहनों से टोल टैक्स वसूल कर सड़क निर्माण की राशि को भरपाई करेगा।
ृ गौरतलब है कि फास्टैग एक इलेक्ट्रोनिक टोल कलेक्शन तकनीक है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग के टोल प्लाजा पर है। इस टैग को वाहन के विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है, टोल प्लाजा पर मौजूद सेंसर इसे डिवाइस रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर टोल कर संबंधित वाहन मालिक के खाते से अपने खाते मेंं हस्तान्तरित कर देता है।
यानि जब कोई वाहन टोल प्लाजा पर फास्टैंग लेन से गुजरता है तो ऑटोमैटिंक रूप से टोल चार्ज कट जाता है। फास्टैंग पांच साले के लिए एक्टिव रहता है, इसे समय पर रिचार्ज करवाना पड़ता है। वर्तमान में नया वाहन खरीदतेे समय ही डीलर आर.सी.के साथ फास्टैंग भी निर्धारित चार्ज देकर देता है।
पुराने वाहनों के लिए इसे नेशनल हाई वे के पाईंट ऑफ सेल अथवा प्राइवेट सेक्टर के बैंक यथा सिंडिकेंट, एक्सिस, एचडी.एफ.सी., आई.सी.आई.सी.आई और पेटियम आदि के माध्यम से खरीदा जा सकता है।
करोना महामारी के कारण लॉक डाउन व बसों व अन्य वाहनों के संचालन पर रोक के कारण कई वाहन चालक फॉस्टैंग रिचार्ज नहीं करवाने वाले, आपातकालीन स्थिति में यात्रा करने वाले वाहन चालकों को पाए उनको टोल प्लाजा पर डबल राशि का भुगतान करना पड रहा है। टोल नाकों पर फॉस्टैग रिचार्ज करने की सुविधा भी जटिल व समय लेने वाली है, टोल नाकों पर सड़क निर्माण कर टोल राशि वसूलने वाली इरकॉन कंपनी, नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया, सार्वजनिक निर्माण विभाग के नेशनल हाई वे के अधिकारियों, स्थानीय टोल अधिकारी, ठेकेदार व उसके के कर्मचारियों व अधिकारियों के नाम व नम्बर किसी बोर्ड पर अंकित नहीं है।
ना ही फास्टैंग रिचार्ज करने के तरीकों की जानकारी है। नम्बरों के अभाव में वाहन चालक टोल से संबंधित कोई समस्या होने पर किसी सक्षम अधिकारी से सम्पर्क भी नहीं कर सकता। टोल प्लॉजा पर तैनात ठेकेदार के कई कर्मचारियों का व्यवहार भी वाहन चालकों व मालिकों के साथ रूढ रहता है।
शिव कुमार सोनी, वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार
















